आईएफएस अधिकारियों की एसीआर पर उठे सवाल
गणेश पाण्डेय, भोपाल। वन विभाग में अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय चरित्रावली (एसीआर) को लेकर नया विवाद सामने आया है। पीसीसीएफ (कैंपा एवं वर्किंग प्लान) मनोज अग्रवाल द्वारा अधीनस्थ आईएफएस अधिकारियों को दिए गए अंकों को लेकर विभागीय हलकों में सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों के अनुसार हाल ही में लिखी गई एसीआर में कुछ अधिकारियों को अधिकतम 10 अंक, जबकि अन्य को 7 से 7.5 अंक दिए गए हैं। इससे विभाग में निष्पक्ष मूल्यांकन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
विभागीय सूत्रों का दावा है कि वर्किंग प्लान से जुड़े कुछ ऐसे अधिकारियों को 10 अंक दिए गए हैं, जिनके पास सर्किल का अतिरिक्त प्रभार भी है और जिन्हें मुख्यालय में अक्सर पीसीसीएफ के संपर्क में देखा जाता रहा है। वहीं अन्य अधिकारियों को अपेक्षाकृत कम अंक मिलने के बाद असंतोष बढ़ा है। सूत्रों के अनुसार कुछ अधिकारी अब इस एसीआर को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) में चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं। विभागीय चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि एसीआर के अंक अधिकारियों की पदोन्नति, पदस्थापना और सेवा रिकॉर्ड पर सीधा प्रभाव डालते हैं, इसलिए इसकी निष्पक्षता बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। विभाग में यह भी चर्चा है कि मनोज अग्रवाल पहले भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान फील्ड अधिकारियों की एसीआर खराब करने की चेतावनी देते रहे हैं।
10 अंक देना क्यों माना जाता है असाधारण?
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार एसीआर में 10 अंक बेहद दुर्लभ (रेयर) माने जाते हैं। यदि किसी अधिकारी को सर्वोच्च अंक दिए जाते हैं तो एसीआर लिखने वाले अधिकारी को स्पष्ट रूप से उल्लेख करना होता है कि किन विशेष उपलब्धियों या कारणों के आधार पर यह अंक दिए गए हैं। सूत्रों का कहना है कि इस बार जिन अधिकारियों को 10 अंक मिले हैं, उनमें कुछ ऐसे नाम भी शामिल हैं जिन्हें पहले शीर्ष अधिकारियों की नजर में औसत प्रदर्शन वाला माना जाता था। इसी वजह से अंक निर्धारण की प्रक्रिया विभाग में चर्चा और आलोचना का विषय बनी हुई है।
एसीआर विवाद पहले भी पहुंच चुका है कैट
वन विभाग में एसीआर को लेकर विवाद पहली बार सामने नहीं आया है। आईएफएस अधिकारी मोहन मीना ने अपनी वार्षिक गोपनीय चरित्रावली में दर्ज प्रतिकूल टिप्पणियों को चुनौती देते हुए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट), जबलपुर में याचिका दायर की है। याचिका में तत्कालीन अपर मुख्य सचिव वन अशोक वर्णवाल, तत्कालीन प्रधान मुख्य वन संरक्षक असीम श्रीवास्तव सहित एसीआर लिखने वाले सभी वरिष्ठ अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है। उनका आरोप है कि बिना उनका पक्ष सुने और बिना उन्हें सूचित किए प्रतिकूल प्रविष्टियां दर्ज की गईं, जो नियमों के विपरीत है। यह मामला फिलहाल कैट में लंबित है।
‘कुछ अधिकारी निजी हित देखकर अंक देते हैं’
सेवानिवृत्त एपीसीसीएफ आजाद सिंह डबास का कहना है कि वह लंबे समय से यह कहते आ रहे हैं कि कुछ अधिकारी एसीआर लिखते समय पूरी तरह निष्पक्ष नहीं रहते। उनके अनुसार कुछ अधिकारी निजी पसंद-नापसंद और व्यक्तिगत हितों के आधार पर अंक देते हैं, हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सभी अधिकारियों को एक जैसा नहीं माना जा सकता और कई अधिकारी पूरी निष्पक्षता से भी मूल्यांकन करते हैं।

