500 करोड़ की जमीन एक रुपए में देने के पटवारी के आरोप की दिग्विजय ने निकाली हवा
गणेश पाण्डेय, भोपाल। वीर भारत ट्रस्ट को भूमि आवंटन को लेकर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा लगाए गए आरोपों पर अब कांग्रेस के भीतर ही अलग राय सामने आ गई है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट कहा कि ‘वीर भारत न्यास’ एक शासकीय ट्रस्ट है और इस मामले में लगाए गए आरोपों का कोई तथ्यात्मक आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि “इस देश में दलालों की कमी नहीं है। दलाल लोग झूठे आरोप लगाकर पैसा वसूलने का काम कर रहे हैं।”
दिग्विजय सिंह ने कहा कि वीर भारत न्यास संस्कृति विभाग से संबंधित एक सरकारी ट्रस्ट है और संबंधित भूमि भी शासकीय है, जिसे केवल एक सरकारी विभाग से दूसरे सरकारी ट्रस्ट को हस्तांतरित किया गया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री इस ट्रस्ट के पदेन अध्यक्ष होते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जब कमलनाथ मुख्यमंत्री थे, तब वे भी इसी पदेन व्यवस्था के तहत ट्रस्ट के अध्यक्ष रहे थे। पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि उनके कार्यकाल में ट्रस्ट की जमीन ओबेरॉय होटल को देने का प्रस्ताव था, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विरोध के कारण वह निर्णय आगे नहीं बढ़ सका। दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद वीर भारत ट्रस्ट को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद नए मोड़ पर पहुंच गया है।
क्या है वीर भारत ट्रस्ट?
वीर भारत न्यास मध्यप्रदेश शासन के संस्कृति विभाग का एक शासकीय संस्थान है, जिसका पंजीकरण अप्रैल 2013 में हुआ था। यह संस्थान भारतीय इतिहास, संस्कृति, स्वतंत्रता सेनानियों, राष्ट्रनायकों, संतों, विचारकों और वैज्ञानिकों से जुड़े शोध, प्रकाशन तथा सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए कार्य करता है। ट्रस्ट की संरचना पूरी तरह सरकारी है और इसके दो-तिहाई से अधिक सदस्य शासन द्वारा नामित किए जाते हैं। मुख्यमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष, जबकि संस्कृति विभाग से जुड़े प्रतिनिधि कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं।
कौन हैं श्रीराम तिवारी?
श्रीराम तिवारी वर्तमान में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सांस्कृतिक सलाहकार हैं और लंबे समय तक मध्यप्रदेश की सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। भारत भवन रंगमंडल को पुनर्जीवित करने, जनजातीय संग्रहालय, विक्रम शोधग्रंथ, राष्ट्रीय सांस्कृतिक समारोहों, मध्यप्रदेश फिल्म विकास निगम, स्वराज संस्थान और कला परिषद की विभिन्न परियोजनाओं में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इसके अलावा आजाद हिन्द रेडियो की परिकल्पना, स्वतंत्रता सेनानियों एवं वीर नायकों पर शोध, जनजातीय परंपराओं के दस्तावेजीकरण और सांस्कृतिक संरक्षण के क्षेत्र में भी उनका उल्लेखनीय योगदान माना जाता है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया था कि वीर भारत ट्रस्ट को करोड़ों रुपये मूल्य की लगभग 500 एकड़ भूमि एक रुपये प्रति एकड़ की दर से आवंटित की गई है। उन्होंने यह भी कहा था कि ट्रस्ट के ट्रस्टी श्रीराम तिवारी मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार हैं। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इन आरोपों को तथ्यहीन बताते हुए स्पष्ट किया कि यह शासकीय ट्रस्ट है और भूमि का हस्तांतरण भी सरकारी व्यवस्था के तहत हुआ है। इस बयान के बाद कांग्रेस के भीतर ही इस मुद्दे पर अलग-अलग राय सामने आने लगी है।
