मुख्यालय के निर्देशों के बाद भी कई वन मंडलों में बदली जा रही टेंडर शर्तें
मानक नियम दरकिनार कर चहेती फर्मों को लाभ पहुंचाने के आरोप
गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश वन विभाग में हर वर्ष होने वाली 80 से 90 करोड़ रुपये की सामग्री खरीदी को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्यालय द्वारा एक समान (यूनिफॉर्म) टेंडर शर्तें लागू करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए जाने के बावजूद कई वन मंडलों में कथित तौर पर अपनी-अपनी शर्तें जोड़कर निविदाएं जारी की जा रही हैं। इससे छोटे और मध्यम उद्योगों के प्रतिस्पर्धा से बाहर होने तथा चुनिंदा फर्मों को लाभ पहुंचाने के आरोप लग रहे हैं। विभागीय सूत्रों का दावा है कि कैंपा, विकास एवं सामाजिक वानिकी मद से होने वाली खरीदी में टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित कर बाजार मूल्य से अधिक दरों पर सामग्री खरीदी जा रही है। हालांकि इन आरोपों की विभागीय स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

दस्तावेज बताते हैं कि तत्कालीन प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने वर्ष 2024 में सभी आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को निर्देश जारी कर मध्यप्रदेश भंडार क्रय नियम एवं सेवा उपार्जन नियम, 2015 (संशोधित 2022) के अनुरूप एक समान टेंडर प्रारूप अपनाने को कहा था। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया था कि कई अधिकारी अपने स्तर पर अतिरिक्त शर्तें जोड़ रहे हैं, जिससे निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो रही है और शिकायतें बढ़ रही हैं। इसके बावजूद विभागीय हलकों में चर्चा है कि कई वन मंडलों में यह व्यवस्था प्रभावी रूप से लागू नहीं हो सकी।

मानक टेंडर लागू करने के लिए मुख्यालय ने जारी किए थे स्पष्ट निर्देश
मुख्यालय के आदेश में स्पष्ट कहा गया था कि सभी निविदाएं निर्धारित ड्राफ्ट के आधार पर ही जारी हों तथा नियंत्रक अधिकारी से अनुमोदन लेने के बाद ही टेंडर प्रकाशित किए जाएं। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई थी ताकि किसी विशेष फर्म को लाभ पहुंचाने वाली शर्तें जोड़ी न जा सकें। इससे पहले तत्कालीन पीसीसीएफ यू.के. सुबुद्धि और तत्कालीन वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव ने एपीसीसीएफ उत्तम शर्मा की अध्यक्षता में समिति बनाकर प्रदेशभर के लिए एकरूप टेंडर शर्तों का प्रारूप तैयार कराया था। विभागीय सूत्रों का कहना है कि बाद के वर्षों में कई वन मंडलों ने इस प्रारूप से हटकर अलग-अलग शर्तों पर निविदाएं जारी करना शुरू कर दिया।

दरों के अंतर ने बढ़ाए सवाल
उपलब्ध टेंडर विवरण में रतलाम, नीमच और मंदसौर वन मंडलों की स्वीकृत दरों की तुलना में कई सामग्रियों के मूल्य में बड़ा अंतर दिखाई देता है।
- सीमेंट : रतलाम ₹319, नीमच ₹328, जबकि मंदसौर ₹396.80 प्रति बैग।
- गिट्टी : रतलाम ₹990, नीमच ₹949, जबकि मंदसौर ₹1694.70 प्रति घनमीटर।
- रेत : रतलाम ₹1218, नीमच ₹1200, जबकि मंदसौर ₹2799।
- ईंट : रतलाम ₹6.39, नीमच ₹5.50, जबकि मंदसौर ₹8.85 प्रति नग।
- बार्ब्ड वायर : रतलाम ₹71 प्रति किलो, जबकि मंदसौर ₹109.74 प्रति किलो।
- चैनल लिंक फेंसिंग : रतलाम ₹72 प्रति किलो, जबकि मंदसौर ₹153 प्रति वर्गमीटर।
इन दरों के अंतर को लेकर विभागीय हलकों में चर्चा है कि एक ही अवधि में अलग-अलग वन मंडलों में इतनी बड़ी मूल्य भिन्नता के कारणों की जांच होनी चाहिए।
पेंच टाइगर रिजर्व की निविदा पर भी उठे सवाल
पेंच टाइगर रिजर्व, सिवनी की एक निविदा में भी तकनीकी विसंगतियों की शिकायत दर्ज कराई गई है। शिकायत के अनुसार निविदा दस्तावेज में लोहे की मात्रा किलोग्राम में दर्शाई गई, जबकि बीओक्यू में दरें क्विंटल के आधार पर मांगी गईं, जिससे भ्रम की स्थिति बनी। इसके अलावा संशोधित जीएसटी दरों के अनुरूप बीओक्यू अपडेट नहीं किया गया और प्री-बिड बैठक भी आयोजित नहीं हुई। शिकायतकर्ताओं ने इसे नियमों के विपरीत बताते हुए कार्रवाई की मांग की है।
कई वन मंडलों में शिकायतें, जांच भी जारी
विभागीय सूत्रों के अनुसार रतलाम, मंदसौर, डिंडोरी, मंडला, अनूपपुर, झाबुआ, बैतूल, नर्मदापुरम, शहडोल और विदिशा सहित कई वन मंडलों की खरीदी प्रक्रिया को लेकर शिकायतें मुख्यालय तक पहुंची हैं। धार वन मंडल से जुड़ी शिकायत की जांच एपीसीसीएफ इंदौर द्वारा किए जाने की चर्चा है, जबकि अन्य मामलों में भी विभागीय स्तर पर जांच चल रही है। अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
लघु उद्योगों को अवसर नहीं मिलने की शिकायत
राज्य सरकार ने सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को प्राथमिकता देने के निर्देश जारी किए हैं, लेकिन कारोबारी संगठनों का आरोप है कि कई टेंडरों की शर्तें ऐसी बनाई जाती हैं, जिनके कारण छोटे उद्यमी प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाते हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि अधिकांश खरीदी जेम (GeM) पोर्टल और ई-टेंडर के माध्यम से हो रही है, जबकि सरकार की मंशा अधिक से अधिक स्थानीय और लघु उद्योग इकाइयों को अवसर देने की रही है। कारोबारियों ने मांग की है कि वन विभाग के सभी टेंडर अनिवार्य रूप से विभागीय वेबसाइट पर सार्वजनिक किए जाएं तथा एक समान टेंडर प्रारूप का कड़ाई से पालन कराया जाए।
