नई दिल्ली
केंद्रीय कैबिनेट ने आज 2,19,353 करोड़ रुपये की सात बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी दे दी। इसमें देश में सेमीकंडक्टर चिप मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए 1,27,500 करोड़ रुपये का सेमीकॉन-2 प्रोजेक्ट भी शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। इनमें बनारस में गंगा और वरुणा नदियों के किनारे चार और छह लेन के एलिवेटेड कॉरिडोर शामिल है।
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि आज उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर में भीड़ कम करने के लिए नेशनल हाईवे-19 और वाराणसी रिंग रोड के बीच एक लिंक/कनेक्टर कॉरिडोर के विकास को मंजूरी दी है। यह कॉरिडोर गंगा नदी के किनारे-किनारे कनेक्टिविटी भी प्रदान करेगा।
सात प्रोजेक्ट्स को मंजूरी
46.039 किलोमीटर लंबे इस प्रोजेक्ट में छह-लेन वाला एलिवेटेड मेन कैरिजवे, एक शानदार केबल-स्टेयड ब्रिज, एक एक्सट्राडोज्ड फुट ओवर ब्रिज-सह-मेजर ब्रिज, लूप, रैंप, लिंक रोड और सर्विस रोड शामिल हैं। इसे हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (HAM) के तहत कुल 14,447.64 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया जाएगा।
वैष्णव ने कहा कि आज कुल सात प्रोजेक्ट मंजूर किए गए जिनकी कुल लागत 2,10,353 करोड़ रुपये है। इनमें वरुणा नदी के साथ एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाएगा जिसकी लागत 10,998 करोड़ रुपये है। साथ ही 62,500 करोड़ रुपये की मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम को भी मंजूरी दी गई है। पारादीप-हरिदासपुर के बीच रेललाइन के दोहरीकरण को भी हरी झंडी मिल गई है। इस पर कुल 2,542 करोड़ रुपये खर्च होंगे। नेशनल इनवेस्टमेंट पॉलिसी फॉर यूरिया-2026 को भी कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।
सेमीकंडक्टर 2.0 क्या है?
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने साथ ही देश के सेमीकंडक्टर डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम के विकास के लिए 'सेमीकॉन 2.0' को मंजूरी दी है, जिसका कुल बजट 1,27,500 करोड़ रुपये है। वैष्णव ने बताया कि भारत में सेमीकंडक्टर सेक्टर को लगातार और लंबे समय तक समर्थन देने की जरूरत को समझते हुए और सेमीकॉन 1.0 से बने मोमेंटम को आगे बढ़ाते हुए सेमीकॉन 2.0 का मकसद देश को दुनिया के सेमीकंडक्टर मैप पर लाने के सरकार के संकल्प को और आगे बढ़ाना है।
अब भारत बनेगा चिप्स का हब
सरकार ने सेमीकॉन 2.0 मिशन को हरी झंडी दे दी है। इसके तहत देश में सेमीकंडक्टर चिप्स बनाने के लिए बड़े निवेश को बढ़ावा मिलेगा। अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ये मिशन भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स में आत्मनिर्भर बनाने का बड़ा कदम है।
मोबाइल फोन और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए जरूरी चिप्स अब ज्यादा मात्रा में भारत में ही बनेगे। इससे न सिर्फ आयात कम होगा बल्कि लाखों नौकरियां भी पैदा होंगी।
मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को नई योजना, निर्यात बढ़ेगा
मोबाइल फोन बनाने की मौजूदा स्कीम को और मजबूत करने का फैसला हुआ है। सरकार अब और ज्यादा कंपनियों को आकर्षित करेगी ताकि भारत 'मोबाइल वर्ल्ड कैपिटल' बने। सस्ते फोन से लेकर हाई-एंड स्मार्टफोन तक यहां असेंबल और मैन्युफैक्चर होंगे। इससे युवाओं को रोजगार मिलेगा और देश की अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।
यूरिया में आत्मनिर्भरता से किसानों को राहत
कैबिनेट ने राष्ट्रीय निवेश नीति को मंजूरी दी है जिससे यूरिया उत्पादन बढ़ेगा। किसानों को अब विदेशी यूरिया पर कम निर्भर रहना पड़ेगा। देश में ही ज्यादा यूरिया बनने से सब्सिडी का बोझ भी कम होगा और खेती आसान बनेगी।
रेलवे सफर होगा तेज और सुरक्षित
रेलवे को आधुनिक बनाने के लिए दो बड़े प्रस्ताव पास हुए। ट्रैक को दोगुना करने और नई चौथी लाइन बिछाने का काम तेज होगा। इससे ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी, देरी कम होगी और माल ढुलाई आसान बनेगी। आम यात्री और व्यापार दोनों को फायदा पहुंचेगा। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि रेलवे देश की लाइफलाइन है और इसे और मजबूत बनाना जरूरी है।
कैबिनेट ने 62,500 करोड़ रुपये के बजट के साथ मोबाइल फ़ोन मैन्युफ़ैक्चरिंग स्कीम (MPMS) को भी मंज़ूरी दी। यह स्कीम सेमीकॉन 2.0 के साथ घोषित मैन्युफ़ैक्चरिंग से जुड़े अहम फ़ैसलों में से एक है। एक और अहम फ़ैसले के बारे में बताते हुए वैष्णव ने कहा कि सरकार ने यूरिया-2026 के लिए नेशनल इन्वेस्टमेंट पॉलिसी को मंज़ूरी दी है। उन्होंने कहा कि इस पॉलिसी का मकसद भारत को यूरिया उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है। यह फ़ैसला एक पॉलिसी मंज़ूरी है और कैबिनेट के फ़ैसलों की सूची में इसके लिए कोई वित्तीय आवंटन शामिल नहीं है।
इसके अलावा, कैबिनेट ने रेलवे इंफ़्रास्ट्रक्चर के दो प्रोजेक्ट्स को मंज़ूरी दी। इसने 2,542 करोड़ रुपये की लागत से पारादीप-हरिदासपुर रेलवे लाइन को डबल करने की मंज़ूरी दी। इसने डंगोआपोसी और राजखरसवां के बीच चौथी रेलवे लाइन को भी मंज़ूरी दी, जिसमें 1,365 करोड़ रुपये का निवेश शामिल है। उन्होंने कहा कि आज सात बड़े फ़ैसले लिए गए। पहले दो फ़ैसले वाराणसी (काशी) में इंफ़्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के नए तरीक़े से जुड़े हैं। तीसरा और चौथा फ़ैसला सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (सेमिकॉन 2.0) को मंज़ूरी देने से संबंधित है। चौथा फ़ैसला मोबाइल फ़ोन मैन्युफ़ैक्चरिंग स्कीम को मंज़ूरी देना है। पाँचवाँ फ़ैसला यूरिया उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के मक़सद से लिया गया है। इसके लिए यूरिया के लिए नेशनल इन्वेस्टमेंट पॉलिसी को मंज़ूरी दी गई है।
