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नई दिल्ली
भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी और दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु ने आखिरकार दो साल से ज्यादा समय बाद बड़ा खिताब जीतकर शानदार वापसी कर ली है. टोक्यो में खेले गए जापान ओपन सुपर 750 के फाइनल में सिंधु ने मेजबान जापान की स्टार खिलाड़ी अकाने यामागुची को सीधे गेमों में 21-17, 21-17 से हराकर इतिहास रच दिया.

वह जापान ओपन जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं. इसके साथ ही 31 साल की उम्र में सुपर-750 खिताब जीतने वाली सबसे उम्रदराज महिला खिलाड़ी भी बन गईं. लेकिन यह कहानी सिर्फ एक ट्रॉफी जीतने की नहीं, बल्कि मानसिक और शारीरिक रूप से खुद को दोबारा खड़ा करने की है. सिंधु ने खुलासा किया कि इस सफर में भारतीय क्रिकेट स्टार विराट कोहली की एक सलाह ने उनकी पूरी सोच बदल दी.

मुश्किल दौर में व‍िराट कोहली को किया था फोन
जापान ओपन जीतने के बाद सिंधु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि वह हमेशा विराट कोहली की आभारी रहेंगी. लगातार खराब प्रदर्शन, इंजरी और मानसिक दबाव के बीच उन्होंने कोहली से बात की थी. उन्हें ऐसे व्यक्ति की जरूरत थी जो टॉप लेवल पर खेलने के अकेलेपन और दबाव को समझ सके.

सिंधु ने बताया कि विराट की सलाह बेहद सरल थी- ट्रॉफियों के पीछे भागना छोड़ो और खेल में अपनी खुशी दोबारा तलाशो. सिंधु ने कहा कि यही बात उनके लिए सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई. आज मुझे पता है कि मैं रोज सुबह 5:30 बजे अभ्यास के लिए क्यों उठती हूं. अब मेरी प्रेरणा सिर्फ ट्रॉफी या जीत नहीं है, बल्कि उससे कहीं ज्यादा गहरी है.

दो साल का संघर्ष, कई बार टूटी उम्मीद
पिछले दो साल सिंधु के करियर के सबसे कठिन दौर में से रहे. स्ट्रेस फ्रैक्चर के बाद फिटनेस से जुड़ी परेशानियां लगातार बनी रहीं. पेरिस ओलंपिक में शुरुआती हार ने उन्हें और झटका दिया. कई बार रिहैब शुरू हुई और बीच में रुक गई. 2024 के सैयद मोदी इंटरनेशल के बाद वह कोई बड़ा खिताब नहीं जीत सकी थीं. लगातार आलोचनाएं भी झेलनी पड़ीं.

सिंधु ने स्वीकार किया कि इंजरी के दौरान कई बार आत्मविश्वास डगमगाता है. उन्होंने कहा- इंजरी के समय आप खुद से सवाल करते हैं कि क्या मैं पहले से ज्यादा मजबूत लौट पाऊंगी? क्या मैं 100 प्रतिशत दे पाऊंगी? ऐसे समय मानसिक और भावनात्मक रूप से काफी टूट जाते हैं. हालांकि उन्होंने कभी खुद से यह नहीं पूछा कि उनका करियर खत्म हो गया है.

खुद को पूरी तरह बदला
वापसी के लिए सिंधु ने सिर्फ मानसिक नहीं बल्कि खेल में भी बड़े बदलाव किए. कोच इरवानस्याह, ट्रेनर वेन लोम्बार्ड और टीम के साथ उन्होंने करीब 3.5 किलोग्राम वजन कम किया. नेट गेम, ड्रॉप शॉट, हाफ स्मैश और लंबे रैलियों में धैर्य पर खास काम किया. उन्होंने कहा- अब सिर्फ स्मैश से मैच नहीं जीते जाते. खिलाड़ियों की डिफेंस काफी मजबूत हो गई है. इसलिए खेल में विविधता जरूरी है. मैंने नेट और बैक कोर्ट दोनों से अलग-अलग शॉट्स का इस्तेमाल किया.

डेटा बना नया हथियार
सिंधु ने बताया कि अब उनकी तैयारी में डेटा एनालिसिस भी अहम भूमिका निभाता है. उन्होंने कहा- डेटा से पता चलता है कि किसी दिन शरीर क्यों सही तरीके से मूव नहीं कर रहा. वरना खिलाड़ी खुद को कमजोर समझने लगता है. डेटा आपको कारण बताता है और उसी हिसाब से ट्रेनिंग व रिकवरी होती है.

फाइनल में दिखाई चैम्प‍ियन वाली मानसिकता
अकाने यामागुची के खिलाफ फाइनल में सिंधु ने शुरुआत से दबदबा बनाया. यामागुची ने वापसी की कोशिश जरूर की, लेकिन सिंधु ने 36 शॉट्स की लंबी रैली जीतकर मुकाबले का रुख बदल दिया. दूसरे गेम में भी उन्होंने दबाव में शानदार संयम दिखाया और 17-17 के बाद लगातार अंक लेकर मैच अपने नाम कर लिया.

अब वर्ल्ड चैम्प‍ियनश‍िप और एश‍ियन गेम्स पर स‍िंधु की नजर
अगले महीने नई दिल्ली में बैडमिंटन वर्ल्ड चैम्प‍ियनशिप आयोजित होगी. इसके बाद जापान में एशियन गेम्स खेले जाएंगे. जापान ओपन की इस जीत ने सिंधु का आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा दिया है. उन्होंने कहा- मैं हमेशा खुद पर विश्वास करती रही हूं. यह खिताब मेरे लिए बेहद महत्वपूर्ण था. इससे भरोसा मिला है कि मैं अब भी बड़े खिताब जीत सकती हूं. मेरी कहानी अभी खत्म नहीं हुई है. सिंधु ने ट्रॉफी का पीछा करना छोड़ दिया था. शायद इसी वजह से टोक्यो में ट्रॉफी खुद उनके पास चली आई.

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