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रायपुर

विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा आम लोगों के लिए बना प्रेरणा और ज्ञान का केन्द्र

नवा रायपुर के आदिवासी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में अंग्रेजी हुकुमत के दौरान जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बने शहीद वीर नारायण सिंह जनजातीय संग्रहालय अपने उद्देश्यों में सार्थक कर रहा है। संग्रहालय को देखने देश-विदेश के पर्यटक बड़ी संख्या में आ रहे हैं, वहीं संग्रहालय विद्यार्थियों-शोधार्थियों सहित आम लोगों के लिए प्रेरणा और ज्ञान का केन्द्र बन रहा है।
       
स्कूलों और कॉलेजों के छात्र-छात्राओं के साथ ही बड़ी संख्या में आमजन संग्रहालय को देखने पहुंच रहे हैं। उद्घाटन के बाद लगभग दस महीनों के अंतराल में ही 2.50 लाख से अधिक दर्शक ने संग्रहालय का अवलोकन कर चुके है। इसमें सर्वोच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश, अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी, विदेशी पर्यटक, शोधार्थी, स्कूल एवं कॉलेज के बच्चें सहित आम नागरिक शामिल है। 
          
गौरतलब है कि आदिम जाति विकास विभाग के मार्गदर्शन में जनजातीय संस्कृति परंपराओं पर आधारित म्यूजियम तथा शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी म्यूजियम का निर्माण तेजी के साथ पूरा हुआ है। वहीं मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और विभागीय मंत्री  राम विचार द्वारा के सतत प्रयासों से यह लोगों के लिए समर्पित हुआ है। इस संग्रहालय को तेजी के साथ निर्माण में आदिम जाति विभाग के प्रमुख सचिव  बोरा का अहम योगदान है।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्योत्सव रजत जयंती के मौके पर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा 01 नवम्बर 2025 को इस भव्य संग्रहालय को लोगों को समर्पित किया गया। आगन्तुकों के लिए शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह-जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय आकर्षण और उत्साह का केंद्र बना हुआ है।  
        
आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने बताया कि छत्तीसगढ़ में जनजातीय वर्गों के ऐतिहासिक गौरव गाथा, शौर्य और बलिदान का प्रतीक शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह-जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के हाथों उद्घाटन होना गौरव की बात है।  बोरा ने कहा कि काफी संख्या में लोग संग्रहालय देखने आ रहे हैं, इससे संग्रहालय बनाने का उद्देश्य सार्थक हो रहा है। विशेषकर छुट्टियों और त्यौहारों के दिनों में लोग बड़ी संख्या में संग्रहालय आते हैं। छुट्टी के दिनों में लगभग 4-5 हजार आगंतुक संग्रहालय देखने आ रहे है, वही आम दिनों में 1000-1200 आगंतुक संग्रहालय का अवलोकन कर रहे है। 

विभाग द्वारा भी आगंतुकों के हिसाब से सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करायी जा रही है। दर्शकों को जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के योगदान संबंधी जानकारी के लिए गाइड की भी व्यवस्था की गई है। संग्रहालय  पूरी तरह से डिजिटली है। संग्रहालय के अंदर मॉनीटर पर दिये गए क्यू आर कोड स्कैन कर तथा माइक्रोफोन के माध्यम से भी जानकारी प्राप्त करने की व्यवस्था भी की गई हैै। इसके साथ ही दिव्यांगों, महिलाओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए व्हीलचेयर व शिशुवती महिलाओं के लिए शिशु देख-रेख कक्ष बनायी गई है। इस संग्रहालय के शुरू होने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने लगा है। प्रमुख सचिव  बोरा ने कहा कि संग्रहालय का धरातल में आने से नई पीढ़ियों को अपने पुरखों की वीरता और साहस को याद दिलाता रहेगा। यह न सिर्फ जनजातीय वर्गों के लिए बल्कि सभी लोगों के लिए प्रेरणाप्रद है।
         
संग्रहालाध्यक्ष डॉ. अनिल वीरूलकर ने बताया कि संग्रहालय देखने आने वाले दर्शकों में काफी उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है। संग्रहालय में छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न राज्यों तथा विदेशोें से भी पर्यटक आ रहे हैं। हाल ही में विदेशी पर्यटकों का दल जनजातीय संग्रहालय देखने आये थे उन लोगों ने भी इस डिजिटल संग्रहालय की काफी प्रशंसा की। इसी तरह नवा रायपुर में राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित डीजीपी कॉन्फ्रेंस के दौरान बड़ी संख्या में प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों ने भी संग्रहालय का भ्रमण कर काफी सराहना की है। इसके साथ ही सेना के भारत के सर्वोच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश  सूर्यकांत सहित न्यायधीशों का दल, प्रशासनिक प्रशिक्षु अधिकारी स्कूल, कॉलेज के छात्र-छात्राएँ व बड़ी संख्या आम नागरिक भी आ रहे हैं। संग्रहालय परिसर में पर्यटकों व आगंतुकों के हिसाब से शुद्ध पेयजल, पार्किंग, शौचालय तथा सूचना केंद्र की सुविधाएं प्रदान की जा रही है। संग्रहालय पूरी तरह सीसीटीवी से लैस है। इसके साथ ही प्राथमिक उपचार केंद्र भी स्थापित किए गए हैं। 
         
भंडारा महाराष्ट्र से अपने परिवार सहित संग्रहालय देखने आयी मती रून्दा विश्वनाथ धु्रवे बताती है कि वे पड़ोसी गांव के लोगों से सुनकर यहां आयी है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर बने स्मारक संग्रहालय बेहद आकर्षक एवं जीवंत है। वे स्वयं जनजातीय समाज की है, उनका कहना है कि इस जीवंत दृश्य को देखकर ऐसा लग रहा है कि हम इसे देखते रहे। ऐसा लग रहा है कि यह वास्तविक में हो रहा है। इन दृश्यों को देखकर हमें अपने पुर्वजो पर गर्व हो रहा है। 
         
रायपुर में यूपीएससी एवं प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रही छात्राओं का दल भी आज संग्रहालय देखने पहुंचे थे। सु दिव्यांशी और सु कृपा मंडेचा ने कहा कि संग्रहालय में चित्रित दृश्य पहले हुई घटनाओं से हमे जोड़ती है वहीं हमें परीक्षा की दृष्टिकोण से भी काफी ज्ञानवर्धक सामग्री प्राप्त हो रही है। इन दोनों ने कहा कि छत्तीसगढ़ को राज्य के बाहर के लोग ज्यादातर माओवादी के नाम से जानते थे, वास्तव में आज जो संग्रहालय बनकर तैयार है उससे यह प्रेरणा बनती है कि यहां अनुकरणीय इतिहास विद्यमान है, ऐसे लोगों को भी संग्रहालय आकर देखने की जरूरत है। इसी तरह बालोद जिले के डौण्डीलोहरा के अपने परिवार सहित संग्रहालय देखने आए  पतिराम साहू का कहना है कि ऐसे दृश्य हम फिल्मों में ही देखते थे, लेकिन प्रत्यक्ष देखने से हमें अपने छत्तीसगढ़ क स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति गर्व हो रहा है।

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