गणेश पाण्डेय, भोपाल। फॉरेस्ट रेंजर पद पर पदोन्नति को लेकर चल रहे विवाद में हाईकोर्ट ने फिलहाल सीधे प्रमोशन का आदेश जारी नहीं किया है, लेकिन प्रभावित कर्मचारियों के अभ्यावेदन पर 45 दिन के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब पदोन्नति का मामला राज्य सरकार के स्तर पर पहुंच गया है।
मप्र कर्मचारी कांग्रेस के प्रांतीय अध्यक्ष मुनेन्द्र सिंह परिहार की ओर से दायर रिट पिटीशन क्रमांक WP 34988/2026 की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि फॉरेस्ट रेंजर पद पर पदोन्नति के लिए विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक हो चुकी है और उसमें निर्णय भी लिया जा चुका है। इसके बावजूद औपचारिक पदोन्नति आदेश जारी नहीं किया गया है।
कोर्ट ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि जिन कर्मचारियों को पदोन्नति आदेश जारी नहीं होने से परेशानी है, वे व्यक्तिगत रूप से अपना अभ्यावेदन प्रस्तुत करें। सरकार संबंधित अभ्यावेदन पर विचार कर कर्मचारी को अपने निर्णय से अवगत कराएगी।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने रिट पिटीशन का निपटारा करते हुए निर्देश दिया कि प्रभावित कर्मचारी अपना अलग-अलग अभ्यावेदन प्रस्तुत करें और संबंधित अधिकारी प्राप्ति की तारीख से 45 दिनों के भीतर उस पर निर्णय लें।
DPC के बाद भी प्रमोशन आदेश क्यों अटका?
पूरे मामले में सबसे बड़ा प्रशासनिक सवाल यही है कि जब DPC की बैठक हो चुकी और उसमें निर्णय भी लिया जा चुका है, तो फिर पदोन्नति आदेश जारी करने में अड़चन कहां है? कर्मचारियों के बीच इसे लेकर असमंजस बना हुआ है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या DPC की अनुशंसा पर कोई आपत्ति है, पदोन्नति सूची पर प्रशासनिक रोक है या किसी अन्य प्रक्रिया के पूरा होने का इंतजार किया जा रहा है।
अब कर्मचारियों को देना होगा व्यक्तिगत अभ्यावेदन
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब प्रभावित कर्मचारियों को व्यक्तिगत रूप से अभ्यावेदन देना होगा। इसके बाद संबंधित विभाग को 45 दिन की निर्धारित समयसीमा में निर्णय लेकर कर्मचारी को इसकी जानकारी देनी होगी। हालांकि, कोर्ट के आदेश का यह अर्थ नहीं है कि कर्मचारियों को सीधे फॉरेस्ट रेंजर पद पर पदोन्नति मिल गई है। पदोन्नति का अंतिम निर्णय सरकार को अभ्यावेदन पर विचार करने के बाद लेना होगा।
वन विभाग में प्रमोशन पर नजर
फॉरेस्ट रेंजर का पद वन विभाग की फील्ड व्यवस्था में महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में पदोन्नति का यह मामला कर्मचारियों के करियर के साथ-साथ विभागीय पदस्थापना और फील्ड प्रशासन से भी जुड़ा है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि प्रभावित कर्मचारी कब अभ्यावेदन प्रस्तुत करते हैं और सरकार 45 दिन की समयसीमा में इस पर क्या फैसला लेती है।
