वनोपज प्रसंस्करण केंद्र में भर्ती घोटाला

गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश के बरखेड़ा पठानी स्थित लघु वनोपज प्रसंस्करण केंद्र में भर्ती घोटाले और अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आया है। बिना किसी विज्ञापन और चयन प्रक्रिया के प्रभावशाली लोगों को सरकारी नौकरियां दी गईं। इतना ही नहीं, एक लैब सहायक को साइंटिस्ट का प्रभार देकर दवाओं की गुणवत्ता की जांच कराई जा रही है, जिससे औषधियों की गुणवत्ता लगातार फेल हो रही है।

सीईओ की मनमानी, वैज्ञानिक पर दबाव

सूत्रों के मुताबिक, केंद्र में तैनात वैज्ञानिक को लैब सहायक द्वारा की गई जांच रिपोर्ट पर जबरन हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया जा रहा है। मानसिक तनाव झेल रहे वैज्ञानिक ने संघ के एमडी को पत्र लिखकर मुख्यालय अटैच करने का अनुरोध किया है

कर्मचारियों में बढ़ते असंतोष के बीच, यह सामने आया है कि संस्थान में अब तक की गई सभी नियुक्तियां सेवा नियमों और पारदर्शिता की धज्जियां उड़ाकर की गई हैं। यह सीधे तौर पर संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 16 (सरकारी नौकरियों में समान अवसर) का उल्लंघन है

कैसे हुआ भर्ती घोटाला?

  • न तो कोई विज्ञापन निकाला गया, न ही कोई पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाई गई।
  • आरक्षण नियमों की अनदेखी कर कुछ खास लोगों को सीधे नौकरी दी गई।
  • संचालक मंडल की मंजूरी लिए बिना मनमाने ढंग से नियुक्तियां की गईं।
  • वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत से इस घोटाले को अंजाम दिया गया।

कानूनी कार्रवाई के दायरे में घोटाला

यह पूरा मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है:

  • धारा 166: लोक सेवक द्वारा विधि का उल्लंघन
  • धारा 409: विश्वासघात एवं सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग
  • धारा 120B: आपराधिक षड्यंत्र

किन पदों पर हुई अवैध नियुक्तियां?

लघु वनोपज प्रसंस्करण केंद्र में बिना विज्ञापन और पारदर्शी प्रक्रिया के राजनीतिक और प्रशासनिक सिफारिशों पर एक दर्जन से अधिक लोगों को नियुक्त किया गया। इनकी नियुक्तियों और योग्यताओं पर सवाल खड़े हो रहे हैं:

  1. डॉ. विजय सिंह – मैन्युफैक्चरिंग कैमिस्ट
  2. डॉ. संजय शर्मा – क्वालिटी कंट्रोल कैमिस्ट
  3. विजयता श्रीवास्तव – लैब सहायक (रसायन)
  4. विजय सिंह राजपूत – लैब सहायक (वनस्पति)
  5. राकेश नागेश्वर – प्रशिक्षण समन्वयक
  6. संजीव दुबे – हर्बेरियम व म्यूजियम प्रभारी
  7. गोपाल मिश्रा – स्टोर लिपिक
  8. दीवाकर सिंह – डाटा एंट्री ऑपरेटर
  9. किरण हरोड़े – डाटा एंट्री ऑपरेटर
  10. केदार सिंह पवार – सहायक ग्रेड-3

कर्मचारी संगठनों की मांग: दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई

संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों पर आपराधिक कार्रवाई हो

  • अवैध वेतन भुगतान की वसूली की जाए।
  • भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के तहत दस्तावेजों की जांच की जाए।
  • भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों को बर्खास्त किया जाए।