सेहरा जोन में सख्त प्रतिबंध के बावजूद VIP अफसर परिवार सहित पहुंचे टाइगर देखने, नियम तोड़ते देख पर्यटकों ने ली फोटो और किया वायरल
गणेश पाण्डेय, भोपाल। वन्य जीवों की सुरक्षा और नियमों की सख्ती के लिए मशहूर बांधवगढ़ नेशनल पार्क में शनिवार को एक बड़ा नियम उल्लंघन उस समय सामने आया, जब वन बल प्रमुख (हॉफ) असीम श्रीवास्तव सहित तीन वरिष्ठ अफसर अपनी-अपनी सरकारी जिप्सियों से परिवार सहित प्रतिबंधित क्षेत्र सेहरा में प्रवेश कर गए।
सेहरा क्षेत्र कोर मगधी जोन का 80% हिस्सा है, जहां पर्यटन अथवा सफारी गाड़ियों का प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित है। यहां टाइगर जामहोल का मूवमेंट रहता है, और इसी संवेदनशीलता के चलते इस क्षेत्र में किसी भी बाहरी गतिविधि पर रोक है। लेकिन 7 जून की सुबह, नियम-कायदों की अवहेलना करते हुए हॉफ असीम श्रीवास्तव, लघु वनोपज संघ के एमडी विभाष ठाकुर और पीसीसीएफ विवेक जैन अपनी जिप्सियों के काफिले के साथ इस प्रतिबंधित क्षेत्र में दाखिल हो गए।
जिन अधिकारियों ने किया उल्लंघन:
- असीम श्रीवास्तव – हॉफ (वन बल प्रमुख)
- विभाष ठाकुर – एमडी, लघु वनोपज संघ
- विवेक जैन – पीसीसीएफ
- एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी (नाम सामने नहीं आया)
पार्क प्रबंधन मौन, नियमन ठप
इस घटना को लेकर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रशासन पूर्णत: किंकर्तव्यविमूढ़ है। एक ओर नियम के तहत आम पर्यटक को तो एक मीटर भी सीमारेखा पार करने की इजाज़त नहीं होती, वहीं जब नियमों की अवहेलना विभाग के शीर्ष अफसर स्वयं करें, तो कार्रवाई की उम्मीद धूमिल हो जाती है।
सेहरा क्षेत्र में गलती से भी कोई जिप्सी न घुसे, इसके लिए पार्क प्रबंधन ने बेरियर लगा रखा है। लेकिन अफसरों के काफिले ने इस बेरियर को पार किया और सीधे उस रूट पर पहुंचे, जहां आम लोगों को रोकने के लिए गाइड को सख्त निर्देश होते हैं।
वन्य प्राणी अधिनियम क्या कहता है?
वन्य प्राणी (संरक्षण) अधिनियम 1972 की धारा 27 और 35 के अंतर्गत, किसी भी संरक्षित क्षेत्र में अनधिकृत प्रवेश, वन्यजीवों की गतिविधियों में बाधा या उनके प्राकृतिक आवास में दखलअंदाजी गंभीर अपराध है। दोषी पाए जाने पर जुर्माना और कारावास दोनों का प्रावधान है।
जाने-अनजाने की दलील नहीं चल सकती
जानकारों का कहना है कि इस मामले में ‘अनजाने में पहुंच गए’ जैसा बचाव बेमानी है, क्योंकि हॉफ असीम श्रीवास्तव पूर्व में पीसीसीएफ वन्य प्राणी रह चुके हैं और पार्क के नियमों से भली-भांति परिचित हैं। यही स्थिति बाकी अधिकारियों की भी है। ऐसे में यह कथित उल्लंघन पूर्वनियोजित और टाइगर दर्शन की लालसा का परिणाम माना जा रहा है।
कैसे वायरल हुई तस्वीर?
वन विभाग की चिंता का बड़ा कारण यह भी बन गया है कि घटना की तस्वीरें सोशल मीडिया पर कैसे लीक हुईं?
इसका उत्तर भी पार्क के भीतर मौजूद पर्यटकों ने ही दे दिया है।
7 जून को मगधी जोन में 15 पर्यटक जिप्सियां मौजूद थीं, जो सुबह 9:30 बजे तक उसी क्षेत्र में थीं।
पर्यटकों ने देखा कि कुछ शासकीय जिप्सियां प्रतिबंधित रूट पर टाइगर शो कर रही थीं।
जब पर्यटकों ने अपने गाइड से उस दिशा में ले जाने की जिद की और मना किया गया, तो कई पर्यटकों ने उक्त दृश्य की तस्वीरें खींच कर वायरल कर दीं।
‘नियम VIP के लिए नहीं?’
घटना के बाद से आम पर्यटक और पर्यावरण प्रेमियों में गहरा असंतोष है। सवाल यह उठता है कि जब आम आदमी को नियम तोड़ने पर जुर्माना या सजा भुगतनी पड़ती है, तो वन विभाग के सबसे वरिष्ठ अधिकारी खुलेआम नियम तोड़ें और कोई कार्रवाई न हो, यह न केवल व्यवस्था पर चोट है, बल्कि वन्य जीव संरक्षण की गरिमा के साथ विश्वासघात भी है।
बांधवगढ़ जैसे संवेदनशील वन्य क्षेत्र में विभाग के सर्वोच्च पदों पर बैठे अधिकारियों द्वारा खुद नियम तोड़े जाना न केवल वन्य प्राणी अधिनियम की अवहेलना है, बल्कि यह एक नैतिक संकट भी है। अब देखना यह है कि क्या विभाग अपने ही शीर्ष अफसरों पर कार्रवाई करने की हिम्मत जुटाता है या यह मामला भी ‘VIP इम्युनिटी’ की आड़ में दबा दिया जाएगा।
