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फायरब्रांड पूर्व आईएफएस आज़ाद सिंह डबास ने सीएम मोहन यादव को लिखा पत्र, कहा – असीम श्रीवास्तव के नेतृत्व में क्षेत्रीय कार्यशालाएं बनीं भ्रष्टाचार का माध्यम

गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश के वन विभाग में बीते दिनों आयोजित की गई रीजनल वर्कशॉप्स अब घोटाले और फिजूलखर्ची के आरोपों में घिरती नजर आ रही हैं। इस मुद्दे को लेकर सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी आज़ाद सिंह डबास ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर मांग की है कि इन कार्यशालाओं में हुए 2 से 3 करोड़ रुपये के अवांछित खर्च की वसूली वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव से की जाए।

डबास ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि इन कार्यशालाओं को वन्यजीव संरक्षण या प्रशासनिक सुधार के उद्देश्य से नहीं, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों के मौज-मस्ती और विदाई समारोहों के रूप में आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों में डांस, गाना, मदिरापान, और बेशकीमती उपहारों की व्यवस्था की गई, जो न सिर्फ नैतिक रूप से आपत्तिजनक है, बल्कि शासकीय धन के दुरुपयोग का खुला उदाहरण भी है।

कहां-कहां हुई वर्कशॉप्स?

डबास द्वारा पत्र में दी गई जानकारी के अनुसार, वर्कशॉप्स निम्न स्थानों पर हुईं –

  • 1 मई: पचमढ़ी – नर्मदापुरम और बैतूल वृत्त
  • 23–24 मई: इंदौर – भोपाल, उज्जैन, खंडवा और इंदौर वृत्त (होटल मैरियट)
  • 30 मई: ओरछा – ग्वालियर, शिवपुरी, छतरपुर वृत्त (राजविलास होटल)
  • 4 जून: जबलपुर – जबलपुर, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा वृत्त
  • 6 जून: बांधवगढ़ – रीवा, शहडोल और सागर वृत्त (डेन टाइगर रिजॉर्ट)

इन सभी आयोजनों में वनमंडलाधिकारी, वन संरक्षक, मुख्य वन संरक्षक, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, प्रबंध संचालक, हॉफ सहित कई अफसर, उनके पत्नी और बच्चों सहित शामिल हुए।

डबास ने लगाए गंभीर आरोप

  • अफसरों को फाइव स्टार होटल्स और सुइट्स में ठहराया गया, जबकि पात्रता नहीं थी।
  • अनऑफिशियल पेमेंट से होटल बुकिंग और शराब की व्यवस्था की गई।
  • स्थानीय वन अमले पर भोजन, मदिरा और उपहारों का भार डाला गया।
  • कार्यशालाओं में अफसरों को मनपसंद गिफ्ट भेंट किए गए।
  • शासन की राशि का दुरुपयोग, वनों की उपेक्षा और सिर्फ सैर-सपाटे पर ध्यान

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग क्यों नहीं?

पत्र में यह भी सवाल उठाया गया है कि जब वन विभाग के पास अत्याधुनिक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाएं उपलब्ध हैं, तब मैदानी अधिकारियों से संवाद स्थापित करने के लिए इतने खर्चीले कार्यक्रमों की जरूरत क्यों पड़ी?
डबास ने लिखा है कि अगर संवाद ही उद्देश्य था, तो वीडियो कांफ्रेंसिंग से यह काम सस्ते और प्रभावी ढंग से हो सकता था।

सेवानिवृत्ति के समय पर संदेह

डबास ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव जुलाई 2025 में सेवानिवृत्त हो रहे हैं, जबकि उनके सबसे खास अधिकारी पीसीसीएफ सुदीप सिंह 30 जून को रिटायर हो रहे हैं। इस संदर्भ में संदेह जताया गया है कि इन कार्यशालाओं के पीछे वास्तविक उद्देश्य ‘विदाई समारोह’ आयोजित करना था, न कि विभागीय हित।

शब्दों में डबास की नाराजगी

डबास ने पत्र में स्पष्ट शब्दों में लिखा है –

“इन कार्यशालाओं का वनों के संरक्षण और संवर्धन से कोई लेना-देना नहीं है। यह कार्यक्रम केवल व्यक्तिगत स्वार्थों की पूर्ति और सैर-सपाटे के लिए आयोजित किए गए। शासन को इसका कोई लाभ नहीं हुआ।”

वन विभाग में पहले से ही टाइगर सफारी विवाद (सेहरा जोन में हॉफ का अनाधिकृत प्रवेश) के चलते विभाग की छवि पर प्रश्नचिह्न लगे हैं, वहीं अब रीजनल वर्कशॉप्स के नाम पर करोड़ों की फिजूलखर्ची ने नए विवाद को जन्म दे दिया है।