आईएफएस सेवानिवृत्त अधिकारी को मिला एक वर्ष का कार्यकाल, अरावली सफारी सहित प्रमुख राष्ट्रीय योजनाओं में देंगे तकनीकी मार्गदर्शन
गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश कैडर के सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारी और विख्यात वन्य प्राणी विशेषज्ञ डॉ. संजय शुक्ला को केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण (CZA) में वरिष्ठ सलाहकार के पद पर मनोनीत किया गया है। उनका यह कार्यकाल 1 अगस्त 2025 से 31 जुलाई 2026 तक प्रभावी रहेगा। डॉ. शुक्ला की नियुक्ति से देश की वन्यजीव संरक्षण नीतियों और चिड़ियाघरों के विकास को नई दिशा मिलने की संभावना है।
महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारियाँ
डॉ. शुक्ला को भारत के क्रिटिकल वन्य प्राणियों के प्रबंधन, चिड़ियाघर परियोजनाओं और वन्यजीव संरक्षण योजनाओं में मार्गदर्शन और तकनीकी सहायता प्रदान करने की ज़िम्मेदारी दी गई है। वे देशभर के मान्यता प्राप्त चिड़ियाघरों के मूल्यांकन और निगरानी में विशेषज्ञ सलाह देंगे और समाधान-आधारित कार्ययोजनाओं को तैयार करवाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
उनकी सलाह CZA के अधीन आने वाले चिड़ियाघरों के सतत और संवेदनशील प्रबंधन दृष्टिकोण के निर्माण में अहम होगी। वे नेशनल रेस्क्यू सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ (NRC-W) की स्थापना प्रक्रिया में भी केंद्रीय भूमिका निभाएंगे।
“अरावली सफारी” परियोजना में भी निभाएंगे भूमिका
डॉ. शुक्ला हरियाणा सरकार के सहयोग से गुरुग्राम में स्थापित की जा रही दुनिया की सबसे बड़ी वन्यजीव सफारी “अरावली सफारी” की योजना, संरचना और तकनीकी सहायता में भी योगदान देंगे। यह परियोजना न केवल भारत की जैव विविधता को संजोने का माध्यम बनेगी, बल्कि पर्यटन और शिक्षा की दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में समृद्ध अनुभव
डॉ. संजय शुक्ला ने अपने सेवाकाल में मध्यप्रदेश के कई वन मंडलों और संरक्षित क्षेत्रों में कार्य करते हुए राज्य को “टाइगर स्टेट” का दर्जा दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वे वन्य प्राणी प्रबंधन, बायोडायवर्सिटी प्लानिंग, ह्यूमन-वाइल्डलाइफ कॉन्फ्लिक्ट मैनेजमेंट तथा वन्यजीव अन्वेषण एवं नीतिगत विकास में विशेषज्ञ माने जाते हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव
डॉ. शुक्ला की नियुक्ति से CZA की परियोजनाओं को विशेषज्ञ मार्गदर्शन मिलेगा, जिससे वन्यजीव संरक्षण की राष्ट्रीय रणनीतियों, चिड़ियाघरों के सुधार, और बायोबैंकिंग जैसी नवाचार योजनाओं को सशक्त आधार मिलेगा। उनकी विशेषज्ञता से देशभर के चिड़ियाघरों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा मिलेगा।

