मामले में लापरवाही और सूचनाओं के स्पष्ट अभाव को लेकर मुख्य वन संरक्षक ने मांगा स्पष्टीकरण, मीडिया रिपोर्ट से उपजा सवाल

गणेश पाण्डेय, भोपाल। दक्षिण बालाघाट वनमंडल में एक मादा बाघ की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में प्रदेश के वन विभाग ने अब सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) शुभरंजन सेन द्वारा आज दक्षिण बालाघाट के वनमंडलाधिकारी अचर गुप्ता को तीन दिन के भीतर इस प्रकरण में स्पष्टीकरण देने का निर्देश जारी किया गया है। यह निर्देश 3 अगस्त 2025 को मीडिया में प्रकाशित उस खबर के आधार पर जारी हुआ है, जिसमें आरोप लगाया गया था कि बाघ के शव की सूचना वन विभाग के अधिकारियों को समय पर नहीं दी गई थी और वनकर्मियों ने ही बाघ का शव जलाने की कार्रवाई की थी।

गौरतलब है कि 3 अगस्त को विभिन्न प्रिंट और सोशल मीडिया में एक खबर प्रकाशित हुई थी जिसमें कहा गया था कि “शव सबूत नष्ट करने वनकर्मियों ने ही जलाया बाघ का शव, बीट गार्ड, चौकीदार ने नहीं दी सूचना, आधा दर्जन ग्रामीणों को वन महकमा बना रहा आरोपी”। इस खबर के आधार पर विभागीय स्तर पर गंभीरता से जांच प्रारंभ कर दी गई है।

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मुख्य वन संरक्षक के पत्र में स्पष्ट किया गया है कि पूर्व में भी 25 जून 2025 के पत्र क्रमांक 108/1914 के माध्यम से अधिकारियों को निर्देशित किया गया था कि बाघ, तेंदुआ, चीता एवं हाथी आदि वन्यप्राणियों की मृत्यु की स्थिति में तुरंत उच्चाधिकारियों को सूचित किया जाए। साथ ही, क्षेत्रीय स्तर पर वन संरक्षक, उप वन संरक्षक एवं संबंधित अधिकारियों के माध्यम से इसकी विधिवत रिपोर्ट प्रस्तुत करना सुनिश्चित किया जाए। लेकिन इस घटना में मीडिया में आई खबर के अनुसार संबंधित अधिकारियों को सूचना नहीं दी गई और उच्च अधिकारियों के संज्ञान में मामला देर से लाया गया।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि इस प्रकार की स्थिति वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना, अनुशासनहीनता तथा अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाही को दर्शाती है। इसी आधार पर दक्षिण बालाघाट के वनमंडलाधिकारी से तीन दिन के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा गया है, ताकि इस प्रकरण में यदि किसी स्तर पर चूक हुई है तो उसे स्पष्ट किया जा सके।

पत्र में यह भी निर्देश दिया गया है कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं के सतत अनुश्रवण एवं सटीक विवेचना के लिए अधिकारी स्वयं निगरानी रखें। इसके अलावा आवश्यकता पड़ने पर लोक अभियोजन अधिकारियों की सहायता से मामले में उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। आवश्यक होने पर सम्बंधित प्रकरण में सीआरपीसी की धारा 197 के तहत प्रशासनिक अनुमति भी समय सीमा के भीतर प्राप्त की जाए।

इस मामले ने अब वन विभाग के भीतर हलचल मचा दी है। पूरे घटनाक्रम की निगरानी स्वयं प्रमुख मुख्य वन संरक्षक कर रहे हैं। साथ ही, ग्रेटर बालाघाट टाइगर लैंडस्केप से जुड़े अन्य अधिकारी भी इस पर नजर बनाए हुए हैं। यदि जांच में यह साबित होता है कि सूचना देने में कोताही बरती गई है या शव के नष्ट किए जाने में विभागीय लापरवाही हुई है तो संबंधित कर्मियों पर सख्त कार्रवाई संभव है।