प्रदेश कांग्रेस में पदों की जमावट को लेकर दिल्ली-भोपाल में हलचल, 12 अगस्त को दिल्ली और 13 को भोपाल में अहम बैठक
गणेश पाण्डेय, भोपाल। रक्षाबंधन के दिन मध्यप्रदेश कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी से दिल्ली में मुलाकात कर संगठन सृजन को लेकर 45 मिनट लंबी चर्चा की। सूत्रों के मुताबिक, इस बातचीत में नाथ ने महाकौशल क्षेत्र में संगठनात्मक फेरबदल न करने की मांग रखी, जबकि पार्टी हाईकमान महाकौशल में राज्यसभा सदस्य विवेक तंखा और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार के सुझावों के अनुसार बदलाव चाहता है।
सूत्रों के अनुसार, कमलनाथ ने साफ संकेत दिया है कि यदि महाकौशल में उनकी मर्जी के मुताबिक जमावट नहीं हुई तो वे खुलकर नाराज़गी जता सकते हैं। इधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी मालवा और मध्य भारत में युवाओं को संगठन की कमान सौंपने के पक्ष में हैं।
प्रदेश कांग्रेस में संगठन सृजन पर 12 अगस्त को दिल्ली में महत्वपूर्ण बैठक होगी, जिसमें जिला अध्यक्षों के चयन पर मुहर लग सकती है। इसके बाद 13 अगस्त को भोपाल में राजनीतिक मुद्दों पर आपात बैठक बुलाई जाएगी।
प्रदेश कांग्रेस की मौजूदा चुनौतियां
प्रदेश में कांग्रेस संगठन की पकड़ कमजोर मानी जा रही है। कई पदाधिकारी केवल कागज़ों में मौजूद हैं और फील्ड में सक्रिय नहीं दिखते। संगठन सृजन की प्रक्रिया में भी “पट्ठा संस्कृति” के समाप्त होने की उम्मीद कम है, क्योंकि अधिकतर चयन जयकारा लगाने वाले कार्यकर्ताओं के पक्ष में हो रहे हैं।
विंध्य में संगठन का काम सीडब्ल्यूसी सदस्य कमलेश्वर पटेल और विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा के हाथों में है, जबकि वरिष्ठ नेता अजय सिंह को नजरअंदाज किया गया है। बुंदेलखंड में भी अनुभवी नेताओं की भागीदारी सीमित है। निमाड़ की जिम्मेदारी अरुण यादव को दी गई है, जबकि ग्वालियर-चंबल में गोविंद सिंह को दरकिनार कर जयवर्धन सिंह के नेतृत्व में संगठन सृजन हो रहा है।
पूर्व विधायक प्रवीण पाठक को भी संगठन में महत्व नहीं दिया जा रहा है, हालांकि वे उमंग सिंगार और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ-दिग्विजय सिंह के करीबी माने जाते हैं।
महाकौशल पर कमलनाथ की पकड़
इंदिरा गांधी के समय से महाकौशल क्षेत्र में कमलनाथ का प्रभाव अटूट रहा है। हालांकि समय के साथ उनके कई करीबी नेता भाजपा में जा चुके हैं और छिंदवाड़ा का अभेद किला भी दरक चुका है, फिर भी नाथ चाहते हैं कि जिला अध्यक्षों से लेकर ब्लॉक स्तर तक संगठन उनकी मर्जी के अनुसार बने। 12 अगस्त की दिल्ली बैठक के बाद यह साफ हो जाएगा कि उनकी मांग कितनी मानी गई है।
