गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा उज्जैन और जबलपुर में प्रस्तावित जू सह रेस्क्यू सेंटर की महत्वाकांक्षी योजना फिलहाल सुप्रीम कोर्ट की अनुमति पर अटकी हुई है। राज्य सरकार ने पहले चरण में उज्जैन के लिए बजटीय प्रावधान भी कर दिया है और केंद्र सरकार के चिड़ियाघर प्राधिकरण से सैद्धांतिक मंजूरी भी मिल चुकी है। लेकिन चूंकि प्रस्तावित जू जंगल की भूमि पर बनाया जाना है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट की स्वीकृति अनिवार्य है। कोर्ट ने ऐसे निर्माण को “गैर-वानिकी गतिविधि” की श्रेणी में रखा है, जिसके लिए विशेष अनुमति आवश्यक होती है।
उज्जैन परियोजना में क्या है स्थिति
उज्जैन में प्रस्तावित जू सह रेस्क्यू सेंटर के लिए सभी प्रारंभिक तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। केंद्र के चिड़ियाघर प्राधिकरण ने सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। अब राज्य का वन विभाग सुप्रीम कोर्ट में अनुमति के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया में है। विभाग इस आवेदन में यह तर्क रखेगा कि वन्यजीव संरक्षण, बचाव और पुनर्वास के उद्देश्य से बनने वाले जू सह रेस्क्यू सेंटर को वानिकी गतिविधि के अंतर्गत माना जाए, ताकि इसे कानूनी मंजूरी मिल सके।
जबलपुर परियोजना अभी प्रारंभिक चरण में
जबलपुर में प्रस्तावित जू सह रेस्क्यू सेंटर के लिए अभी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार नहीं हुई है। डीपीआर बनने के बाद इसे केंद्र के चिड़ियाघर प्राधिकरण को भेजा जाएगा। वहां से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद ही सुप्रीम कोर्ट से अनुमति की प्रक्रिया शुरू होगी।
राजस्व भूमि पर क्यों नहीं है दिक्कत
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यदि जू सह रेस्क्यू सेंटर राजस्व भूमि पर बनाया जाए, तो इसके लिए सुप्रीम कोर्ट की स्वीकृति की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन उज्जैन की परियोजना जंगल की भूमि पर प्रस्तावित है, जिससे पक्के निर्माण को गैर-वानिकी गतिविधि माना गया है और कानूनी मंजूरी जरूरी हो गई है।
वन्यजीव संरक्षण से जुड़ा महत्व
दोनों शहरों में बनने वाले जू सह रेस्क्यू सेंटर का उद्देश्य न केवल आम जनता के लिए शैक्षिक और पर्यटन अवसर प्रदान करना है, बल्कि घायल, बीमार और अनाथ वन्यजीवों के बचाव और पुनर्वास के लिए भी इनका उपयोग होगा। वन विभाग का मानना है कि इससे प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को नई दिशा मिलेगी।
अगले कदम
उज्जैन के मामले में सुप्रीम कोर्ट में आवेदन दाखिल होने के बाद, अनुमति मिलने पर निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाएगा। जबलपुर में पहले डीपीआर और फिर अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि सब कुछ योजना के मुताबिक चला, तो उज्जैन का जू सह रेस्क्यू सेंटर अगले दो से तीन वर्षों में तैयार हो सकता है।
