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गणेश पाण्डेय, भोपाल। तवा नदी के बड़चापड़ा घाट के पास शुक्रवार को एक टाइगर का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। लेकिन सवाल उठ रहा है कि बिना पीओआर (प्राइमरी ऑफेंस रिपोर्ट) दर्ज किए ही सतपुड़ा टाइगर रिजर्व (एसटीआर) प्रबंधन ने शव का अंतिम संस्कार क्यों कर दिया?

📌 नियमों का उल्लंघन?

वन्यजीव संरक्षण से जुड़े नियमों के अनुसार, किसी भी टाइगर या संरक्षित प्रजाति की मौत की स्थिति में सबसे पहले पीओआर दर्ज होना अनिवार्य है। इसके बाद ही पोस्टमार्टम, जांच और आगे की कार्रवाई की जाती है।
लेकिन इस मामले में, एसटीआर प्रबंधन ने सीधे अंत्येष्टि कर दी, जिससे पूरे प्रकरण पर सवाल खड़े हो गए हैं।

टाइगर मौत पर कार्रवाई में गड़बड़ी

📌 वन विभाग की कार्यप्रणाली पर संदेह

स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस जल्दबाजी में सबूत नष्ट हो सकते हैं
कई बार ऐसी घटनाओं में मौत का कारण स्पष्ट करने के लिए वैज्ञानिक जांच जरूरी होती है, लेकिन शव जलाने से पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सबूत दोनों खत्म हो जाते हैं।

📌 एसटीआर प्रबंधन का पक्ष

सूत्रों का कहना है कि एसटीआर प्रबंधन ने शव को संदिग्ध हालात और सड़ांध की स्थिति को देखते हुए जल्द निपटान करने का निर्णय लिया। हालांकि इस पर आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

तवा नदी में टाइगर की मौत पर कार्रवाई

📌 पर्यावरण प्रेमियों की मांग

  • इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
  • जो अधिकारी गाइडलाइन तोड़ने के लिए जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई हो।
  • भविष्य में ऐसे मामलों में पारदर्शिता और वैज्ञानिक प्रक्रिया को अपनाया जाए।

📌 पृष्ठभूमि

मध्यप्रदेश में बीते कुछ वर्षों में टाइगर की मौतों के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रबंधन की लापरवाही, शिकारियों की सक्रियता और पारदर्शिता की कमी इन मौतों के पीछे अहम कारण हैं।

यह घटना सिर्फ एक टाइगर की मौत नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण तंत्र पर गहरे सवाल खड़े करती है। अगर गाइडलाइन का पालन ही नहीं होगा तो टाइगर प्रोजेक्ट और संरक्षित क्षेत्रों की विश्वसनीयता पर संकट खड़ा हो सकता है।