इटारसी रेंज के पांडरी वन क्षेत्र में 650 से अधिक सागौन के पेड़ काटे गए, रिपोर्टों में गुमराही के आरोप

गणेश पाण्डेय, भोपाल। नर्मदापुरम वन मंडल के इटारसी रेंज के पांडरी वन क्षेत्र में नवंबर 2024 में हुई बड़े पैमाने पर अवैध कटाई का मामला अब गंभीर मोड़ ले चुका है। करीब डेढ़ करोड़ रुपए मूल्य के सागौन वृक्ष माफिया द्वारा काटे जाने के नौ महीने बाद विभाग ने एसडीओ और रेंजर पर कार्रवाई का निर्णय लिया है। जल्द ही दोनों अधिकारियों को आरोप-पत्र जारी किए जाएंगे

सूत्रों के अनुसार, डीएफओ मयंक गुर्जर ने इस पूरी कटाई को लेकर पीसीसीएफ (संरक्षण) विभाष ठाकुर को जो रिपोर्ट भेजी थी, उसमें तथ्यों को गोलमोल तरीके से प्रस्तुत किया गया। सबसे अहम बात यह कि रिपोर्ट में एफओसीआर (Forest Offense Case Registered) का उल्लेख ही नहीं किया गया, जबकि यह अनिवार्य था।

रिपोर्ट पर उठे सवाल, अधिकारियों पर गंभीर आरोप

जानकारी के मुताबिक, पीसीसीएफ द्वारा जब डीएफओ से स्पष्टीकरण मांगा गया, तभी यह कार्रवाई आगे बढ़ाई गई। उससे पहले डीएफओ ने केवल दो बीट गार्ड को निलंबित करके मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की थी। हालांकि फील्ड से आ रही सूचनाएं बताती हैं कि सीएफ और डीएफओ दोनों ही अवैध कटाई पर अंकुश लगाने में नाकाम रहे। इतना ही नहीं, वे मौके पर निरीक्षण के लिए भी नहीं पहुंचे।

सूत्रों का दावा है कि जनवरी 2024 से अब तक 650 से अधिक सागौन के वृक्ष काटे जा चुके हैं, जिनके ठूंठ अब भी मौके पर मौजूद हैं। पीसीसीएफ को भेजी गई रिपोर्ट में RF 112 क्षेत्र में 356 वृक्षों की अवैध कटाई का उल्लेख है, लेकिन एफओसीआर का जिक्र फिर भी गायब है।

आरटीआई से खुला बड़ा सच

सेवानिवृत्त एसडीओ मधुकर चतुर्वेदी द्वारा प्राप्त आरटीआई जवाब ने इस पूरे मामले की परतें और खोल दी हैं। 14 अगस्त 2025 को दिए गए विभागीय जवाब में स्पष्ट हुआ कि अकेले छीपीखापा RF 112 में 619 से अधिक अवैध कटाई के प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इसके विपरीत, डीएफओ द्वारा पीसीसीएफ को भेजी गई रिपोर्टों में केवल 27 से 30 नवंबर 2024 तक दर्ज मामलों का ही हवाला दिया गया।

“सुरक्षा छोड़ बंगले की चाकरी” – रिटायर्ड एसडीओ का आरोप

मामले पर सेवानिवृत्त एसडीओ मधुकर चतुर्वेदी ने सीएफ नर्मदापुरम अशोक कुमार को पत्र लिखकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
उनका कहना है कि छीपीखापा बीट में लगातार सागौन वृक्षों की सेलेक्टिव फेलिंग हो रही है, लेकिन अधिकारी इसकी जानकारी तक समय पर नहीं जुटा पा रहे। चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि वन रक्षकों को जंगलों में तैनात करने की बजाय कार्यालय और अधिकारियों के बंगलों पर चाकरी में लगाया जा रहा है, जिससे वन सुरक्षा बुरी तरह प्रभावित हो रही है।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि वरिष्ठ एपीसीसीएफ रहे एचएस मोहता ने स्पष्ट आदेश दिए थे कि वन रक्षकों को लिपिकीय कार्यों में नहीं लगाया जाए। इसके बावजूद डीएफओ स्तर पर इन निर्देशों की लगातार अनदेखी हो रही है और इस पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।

खबर का असर

Indianbreakingnews.com की खबर के बाद विभाग हरकत में आया

नर्मदापुरम वन मंडल में इटारसी रेंज के पांडरी वन क्षेत्र की अवैध सागौन कटाई पर Indianbreakingnews.com की खबर ने बड़ा असर डाला है। हमारी वेबसाइट ने शीर्षक नर्मदापुरम में डेढ़ करोड़ के जंगल साफ़: सागौन कटाई कांड से हिला वन विभाग के साथ खबर प्रकाशित की थी। इस रिपोर्ट में डीएफओ की निष्क्रियता, बीट चेकिंग रिपोर्ट में गुमराही और एफओसीआर का उल्लेख न होने जैसे गंभीर बिंदुओं को सामने लाया गया था।

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इस खुलासे के बाद ही पीसीसीएफ (संरक्षण) विभाष ठाकुर ने डीएफओ से जवाब तलब किया और अब विभाग ने कार्रवाई की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। नौ महीने तक दबे इस मामले में आखिरकार एसडीओ और रेंजर को आरोप-पत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

खबर के असर से यह स्पष्ट हुआ है कि विभागीय लापरवाही को अब अनदेखा नहीं किया जा सकता। लगातार हो रही कटाई और लाखों-करोड़ों के नुकसान पर जिम्मेदार अधिकारियों को जवाब देना ही होगा।

Indianbreakingnews.com की यह रिपोर्ट वन संरक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर एक ठोस पहल साबित हुई है। बता दें कि नर्मदापुरम वन मंडल का यह प्रकरण केवल जंगलों की अवैध कटाई भर का मामला नहीं है, बल्कि यह विभागीय लापरवाही और मिलीभगत की गंभीर तस्वीर भी पेश करता है। अब सवाल यह है कि आरोप-पत्र जारी होने के बाद भी क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई होगी, या यह मामला भी कागजी खानापूर्ति तक ही सीमित रह जाएगा।