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गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश में स्मार्ट मीटर घोटाले को लेकर राजनीति गरमा गई है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस विधायक अजय सिंह ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार ने ऐसे ठेकेदारों को काम सौंप दिया है, जिनका पाकिस्तान से जुड़ा संदिग्ध कनेक्शन है। उन्होंने मांग की है कि मुख्यमंत्री इस पर तत्काल रोक लगाएं और पूरे प्रकरण पर जनता के सामने श्वेत पत्र जारी करें।

अजय सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार ने स्मार्ट मीटर का ठेका अल्फानार कंपनी को दिया, जबकि इस कंपनी ने एस्यासाफ्ट नामक पाकिस्तानी मूल की आईटी फर्म से समझौता किया है। यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में, जब पाकिस्तान से आए दिन भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियाँ चल रही हों, तब पाकिस्तान से संबंध रखने वाली किसी कंपनी को काम देना सीधे-सीधे सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है।

“घोटाले का पैटर्न साफ़, जनता की जेब पर सीधा वार”

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि यह स्मार्ट मीटर योजना केवल घोटाले का जरिया है। पहले सरकारी कंपनी ने इस प्रोजेक्ट के लिए 11,500 करोड़ का अनुमान लगाया था, लेकिन निजी कंपनी ने यह काम केवल 7,500 करोड़ रुपये में लेने का प्रस्ताव रखा। इतने बड़े अंतर ने ही घोटाले की आशंका को पुख्ता कर दिया है।

उन्होंने कहा कि घटिया मीटर लगाए गए हैं, जिनसे उपभोक्ताओं के बिल अचानक कई गुना बढ़ गए हैं। कई जगह मीटर में आगजनी की घटनाएं भी सामने आई हैं। उन्होंने तंज कसा कि “इससे साफ है कि सरकार का मकसद जनता को सस्ती और सुरक्षित बिजली देना नहीं, बल्कि ठेकेदारों को लाभ पहुंचाना है।”

मुख्यमंत्री से मांगा जवाब

अजय सिंह ने मुख्यमंत्री से सीधा सवाल पूछा है कि आखिर ऐसी कंपनी को ठेका क्यों दिया गया, जिसका संबंध पाकिस्तान से है। उन्होंने कहा कि जनता को सच्चाई जानने का हक है और सरकार को इस पर श्वेत पत्र जारी करना चाहिए। साथ ही ठेकेदार कंपनी पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया तो कांग्रेस जनता के बीच जाकर व्यापक आंदोलन खड़ा करेगी।