राखी नंदा, फील्ड डायरेक्टरराखी नंदा, फील्ड डायरेक्टर

फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा की पहल पर नर्मदापुरम, भोपाल, बैतूल और छिंदवाड़ा में अधिकारियों व स्टाफ की साझा कार्ययोजना तैयार, M-STrIPES एप और समुदाय की भूमिका अहम

गणेश पाण्डेय, भोपाल। सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व में बाघ का शिकार सामने आने के बाद अब वन विभाग ने शिकारी गतिविधियों पर सख्ती से लगाम कसने की तैयारी कर ली है। फील्ड डायरेक्टर राखी नंदा ने नर्मदापुरम, भोपाल, बैतूल और छिंदवाड़ा जिलों के वन अधिकारियों और फ्रंटलाइन स्टाफ को गोलबंद कर एक साझा रणनीति बनाई है। इस पहल का मकसद न केवल शिकार और अवैध गतिविधियों की रोकथाम करना है, बल्कि पूरे परिदृश्य में वन्यजीव संरक्षण के लिए एकीकृत दृष्टिकोण स्थापित करना है।

नंदा ने स्पष्ट किया है कि यह रणनीति लैंडस्केप-आधारित होगी, जिसके अंतर्गत टाइगर रिज़र्व और उसके आसपास के सभी वन वृत्तों के अधीनस्थ वनमंडल आपस में तालमेल के साथ काम करेंगे। सभी स्तरों के अधिकारियों की जिम्मेदारियाँ निर्धारित की गई हैं। साथ ही पुलिस, राजस्व, रेलवे, मत्स्य, विद्युत विभाग और एसटीएसएफ जैसी एजेंसियों के साथ नेटवर्क मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।

साझा रणनीति की प्रमुख बातें

इस रणनीति में M-STrIPES एप का नियमित उपयोग, नियमित समीक्षा और समन्वय बैठकें, समुदाय की भागीदारी और तकनीक आधारित निगरानी को विशेष महत्व दिया गया है। भोपाल, बैतूल और छिंदवाड़ा सर्किल के वन संरक्षकों और डीएफओ से कहा गया है कि वे इस कार्ययोजना को अपने-अपने क्षेत्राधिकार में क्रियान्वित करें और समय-समय पर इसकी प्रगति रिपोर्ट फील्ड डायरेक्टर कार्यालय को भेजें।

वन्यजीव संरक्षण एक सतत चुनौती

सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व और इसके आसपास के जंगलों में वन्यजीव संरक्षण हमेशा से चुनौतीपूर्ण रहा है। शिकार और अवैध गतिविधियां न केवल जैव विविधता को नुकसान पहुंचाती हैं बल्कि पूरे परिदृश्य की पारिस्थितिकी पर भी गहरा असर डालती हैं। यही कारण है कि एकीकृत रणनीति तैयार की गई है, जिसमें हर स्तर के अधिकारी और ग्रामीण समुदाय की जिम्मेदारियां तय की गई हैं।

भूमिकाएं और जिम्मेदारियां

  • वनरक्षक: गश्त की नियमितता (फुट/व्हीकल/एलीफैंट/बोट), वन अपराध की सूचना, M-STrIPES एप से रिपोर्टिंग, कैमरा ट्रेपिंग और बाघों की मूवमेंट की सतत निगरानी।
  • साप्ताहिक संवाद: हर सप्ताह ग्रामीणों और संयुक्त वन समितियों से संवाद कर वन्यप्राणी सुरक्षा, योजनाओं और मानव-वन्यजीव द्वंद रोकने के उपायों पर जागरूकता।
  • वनपाल/डिप्टी रेंजर: बीट निरीक्षण, गश्त का समन्वय, कैमरा ट्रेपिंग की निगरानी, डाटा विश्लेषण और अपराधों का त्वरित निराकरण।
  • रेंजर: मासिक गश्त, पूर्णिमा से पहले और बाद विशेष रात्रि गश्त, त्यौहारों पर विशेष गश्ती आयोजन, पेट्रोलिंग कैंप और चौकियों का सुदृढ़ीकरण, संदिग्ध गतिविधियों पर पुलिस और अन्य एजेंसियों से समन्वय।

समुदाय की भागीदारी

रणनीति में यह प्रावधान भी शामिल है कि फॉरेस्ट गार्ड सप्ताह में एक बार ग्रामीणों और समितियों से संवाद करें। किसी भी मांसाहारी प्राणी की उपस्थिति की स्थिति में ग्रामीणों को मुनादी कर जागरूक करने की जिम्मेदारी तय की गई है ताकि मानव-वन्यजीव संघर्ष से बचा जा सके।

सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व द्वारा उठाया गया यह कदम न केवल शिकारियों के लिए मुश्किलें खड़ी करेगा बल्कि पूरे मध्यप्रदेश में वन्यजीव संरक्षण के लिए एक मॉडल साबित हो सकता है। आधुनिक तकनीकों के उपयोग और समुदाय की भागीदारी से यह पहल अधिक प्रभावी बनने की उम्मीद है।