धीमी रफ्तार से हो रही कमी, पीछे से पानी आने और बैराज से निकासी के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई
चंद्रकेतु मिश्रा, प्रयागराज। गंगा और यमुना नदियों का जलस्तर बीते तीन दिनों से घटने का क्रम जरूर जारी है, लेकिन राहत की गति बेहद धीमी है। दोनों नदियों में पानी की गिरावट औसतन प्रतिघंटे 0.25 से 0.50 सेंटीमीटर ही दर्ज की गई है। यही वजह है कि बाढ़ से प्रभावित इलाकों में लोगों की परेशानियां कम नहीं हो पा रही हैं। कछारी इलाके की दर्जनों बस्तियाँ अब भी पानी में डूबी हैं और हजारों लोग घर छोड़कर अस्थायी शिविरों में शरण लेने को मजबूर हैं।
धीमी रफ्तार से घटता जलस्तर, फिर भी संकट गहराया
सिंचाई विभाग की गुरुवार शाम चार बजे की रिपोर्ट के अनुसार, फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 84.07 मीटर दर्ज किया गया, जिसमें प्रति घंटे केवल 0.25 सेमी की कमी हुई। वहीं, नैनी में यमुना का जलस्तर 83.80 मीटर रहा और इसमें 0.50 सेमी की गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि, राहत की इस मामूली खबर के बीच टोंस नदी अब भी बड़ी मात्रा में पानी छोड़ रही है और कानपुर बैराज से छोड़े गए अतिरिक्त पानी ने बाढ़ का खतरा और बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पीछे से और पानी आया तो जलस्तर स्थिर होने के बजाय फिर से बढ़ सकता है।

कछारी इलाकों में तबाही का मंजर
प्रयागराज के कछारी इलाकों में बाढ़ का पानी अब भी पसरा हुआ है। बघाड़ा, सलोरी, बेली कछार, बेली गांव, नेवादा और अशोक नगर के बड़े हिस्से जलमग्न हैं। सड़कों पर नावें चल रही हैं और कई जगह पानी घुटनों से लेकर कमर तक भर गया है।
हजारों घर पानी में डूब चुके हैं। भोजन पकाना और आवश्यक सामान लाना-ले जाना बड़ी चुनौती बन गया है। बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना सबसे मुश्किल काम साबित हो रहा है।
राहत शिविरों में लगातार बढ़ती भीड़
प्रशासन ने शहर में फिलहाल 5 बाढ़ राहत शिविर संचालित किए हैं, जहां पीड़ित परिवारों को भोजन, पानी और रहने की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। गुरुवार तक शिविरों में 1440 लोग रह रहे थे, जबकि बुधवार को यह संख्या 1410 थी।
हालांकि, शिविरों में जगह और संसाधनों की कमी महसूस की जा रही है। कई परिवारों का कहना है कि उन्हें पीने के पानी और दवा जैसी सुविधाएँ सीमित मात्रा में मिल रही हैं। प्रशासन का कहना है कि जरूरत पड़ने पर दो और शिविर खोले जाएंगे और किसी को भी असुविधा नहीं होने दी जाएगी।

सबसे ज्यादा प्रभावित मोहल्ले और गांव
- सदर तहसील: कछार मऊ, मऊ सरैया, बघाड़ा जहरूद्दीन, बघाड़ा बालन, मेहंदौरी कछार, शिवकुटी, नेवादा, बेली, सलोरी, दारागंज।
- फूलपुर: सोनौटी, बदरा धोकरी, लीलापुर।
- करछना: देहली, भगेसर।
- मेजा: झरियारी, अमिलिया खुर्द।
- सोरांव: फाफामऊ, गंगानगर।
इन सभी इलाकों में पानी का स्तर इतना ज्यादा है कि कई जगह घरों की पहली मंज़िल तक पानी पहुंच चुका है। लोग छतों पर दिन-रात गुजारने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों की पीड़ा
बेली गांव के निवासियों ने बताया, “घर में घुटनों तक पानी भर गया है। बच्चों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया है लेकिन हम खुद अपने सामान की रखवाली कर रहे हैं। बिजली कटी हुई है और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है।”
नेवादा के लोगों का कहना है कि, “राहत शिविर में हमें खाना तो मिल रहा है लेकिन भीड़ इतनी है कि बच्चों के लिए दवा और दूध की कमी महसूस हो रही है। अगर जल्द ही पानी नहीं घटा तो हालात और बिगड़ सकते हैं।”
प्रशासन की तैयारियां और चुनौतियां
जिलाधिकारी ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है और कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे सक्रिय है। बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए खाने-पीने की वस्तुएं, दवाएं और नावों की व्यवस्था की गई है।
कंट्रोल रूम नंबर
- 0532-2641577
- 0532-2641578
- 0532-2641597
- 0532-2641598
- 1077
प्रशासन का दावा है कि किसी को भूखा नहीं रहने दिया जाएगा, लेकिन राहत कार्यों की रफ्तार पर सवाल भी उठ रहे हैं। सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवकों ने कहा कि प्रशासन को शिविरों में और बेहतर इंतज़ाम करने चाहिए।
बाढ़ की वजह और आगे की संभावना
विशेषज्ञों का कहना है कि गंगा और यमुना का जलस्तर फिलहाल धीरे-धीरे घट रहा है, लेकिन टोंस नदी और बैराज से छोड़े गए पानी के कारण स्थिति अभी भी नाजुक बनी हुई है।
- यदि अगले कुछ दिनों में पीछे से और पानी आया तो जलस्तर फिर से बढ़ सकता है।
- फिलहाल अनुमान है कि जलस्तर में गिरावट का क्रम जारी रहेगा, लेकिन इसकी रफ्तार बहुत धीमी रहेगी।
लोगों की मांग – जल्द मदद और स्थायी समाधान
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि न केवल राहत सामग्री की आपूर्ति तेज की जाए बल्कि दीर्घकालिक समाधान भी तलाशा जाए। हर साल आने वाली बाढ़ से हजारों परिवारों का जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है।
विशेषज्ञों का सुझाव है कि कछारी इलाकों में रहने वाले लोगों के पुनर्वास की दिशा में ठोस नीति बनाई जानी चाहिए। इसके अलावा बैराजों के पानी का प्रबंधन और नदियों के प्रवाह की समय रहते मॉनिटरिंग जरूरी है।
गंगा और यमुना नदियों का जलस्तर घटने से थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। कछारी इलाकों में तबाही का मंजर अभी भी जारी है और हजारों लोग घर छोड़कर शिविरों में रहने को मजबूर हैं। प्रशासनिक प्रयास जारी हैं, लेकिन स्थिति सामान्य होने में अभी और समय लग सकता है।
