कई दिनों की बारिश के बाद अब कम हो रहा पानी, प्रशासन ने जारी की सतर्कता, गांवों से लौटने लगे लोग
चंद्रकेतु मिश्रा, प्रयागराज। गंगा और यमुना के संगम की नगरी प्रयागराज बीते कई दिनों से बाढ़ के साये में जी रही थी। मानसून की तेज बारिश और ऊपरी बांधों से छोड़े गए पानी के कारण दोनों नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर चला गया था। मगर अब एक सुखद खबर आई है। लगातार दो दिनों से दोनों नदियों के जलस्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है। प्रशासन और जल संसाधन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि जलस्तर में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। इससे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों ने राहत की सांस ली है।
बाढ़ से हजारों परिवार प्रभावित
पिछले पखवाड़े प्रयागराज और उसके आसपास के इलाकों में गंगा और यमुना का पानी तेजी से बढ़ा। कीडगंज, दारागंज, नैनी, सलोरी, झूंसी और फाफामऊ जैसे निचले क्षेत्रों में पानी घुस गया। ग्रामीण इलाकों में भी हालात खराब रहे। हजारों परिवारों को अपना घर छोड़कर अस्थायी शिविरों और रिश्तेदारों के यहां शरण लेनी पड़ी। मवेशियों और फसलों को भी नुकसान हुआ।
प्रशासन ने एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की मदद से राहत कार्य चलाए। नावों से फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला गया। लेकिन लोगों की चिंता लगातार बढ़ते पानी से थी, जो अब घटने लगा है।

कितनी घटी है गंगा-यमुना का जलस्तर
केंद्रीय जल आयोग (CWC) की रिपोर्ट के अनुसार, गंगा का जलस्तर फाफामऊ में और यमुना का जलस्तर नैनी में एक दिन में करीब 8 से 10 सेंटीमीटर घटा है। संगम क्षेत्र में दोनों नदियों की धाराएं भी पहले की तुलना में शांत हुई हैं। जलस्तर घटने से सड़कों पर जमा पानी उतरने लगा है।
हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि नदियों का स्तर सामान्य होने में अभी कुछ दिन लगेंगे। प्रशासन ने सतर्कता बरतने की अपील की है क्योंकि मौसम विभाग ने फिर से हल्की बारिश की संभावना जताई है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में जीवन पटरी पर
पानी घटने के साथ ही बाढ़ प्रभावित लोग अब अपने घरों की ओर लौटने लगे हैं। नैनी और दारागंज क्षेत्र के कई परिवार जो अस्थायी शिविरों में रह रहे थे, अपने घर वापस पहुंचे। हालांकि घरों में कीचड़ और मलबे की समस्या बनी हुई है। कई इलाकों में बिजली और पानी की सप्लाई अभी पूरी तरह बहाल नहीं हुई है।
ग्रामीण इलाकों में खेती को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। धान और सब्जियों की फसलें पानी में डूबने से बर्बाद हो गईं। किसान अब राहत पैकेज की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन की तैयारी और चुनौतियां
प्रयागराज जिला प्रशासन का कहना है कि जलस्तर में गिरावट राहत की बात है, लेकिन पूरी तरह स्थिति सामान्य होने में समय लगेगा। नगर निगम और ग्रामीण निकायों की टीमें सफाई और स्वास्थ्य संबंधी कामों में जुटी हुई हैं। कीचड़ और गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल टीमों को गांव-गांव भेजा है।
जिलाधिकारी संजय खत्री ने कहा कि “गंगा और यमुना के जलस्तर में गिरावट राहत की बात है। लेकिन हम अभी भी अलर्ट मोड पर हैं। सभी बाढ़ प्रभावित इलाकों में निगरानी रखी जा रही है। लोगों से अपील है कि नदियों के किनारे जाने से बचें और प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।”
मौसम विभाग का पूर्वानुमान
मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में बारिश की तीव्रता कम हुई है। प्रयागराज में भी अगले सप्ताह सामान्य बारिश ही होने की संभावना है। इससे जलस्तर में और कमी आने की उम्मीद है। लेकिन यदि मध्य प्रदेश और उत्तराखंड क्षेत्र में भारी बारिश होती है, तो स्थिति फिर बदल सकती है।
उम्मीदों की किरण
बाढ़ की मार झेल चुके प्रयागराज के लोग अब उम्मीद कर रहे हैं कि पानी जल्द ही पूरी तरह उतर जाएगा और जिंदगी फिर से सामान्य हो जाएगी। गंगा-यमुना के जलस्तर में गिरावट से न केवल शहर के जीवन में रौनक लौट रही है, बल्कि किसानों और व्यापारियों के चेहरों पर भी उम्मीद की चमक आई है।
