Images (8)

प्रदूषण नियंत्रण उपायों का असर, स्वच्छ हवा की दिशा में बढ़ा शहर; प्रशासन और जनता के संयुक्त प्रयासों की सराहना

चंद्रकेतु मिश्रा, प्रयागराज। संगम नगरी प्रयागराज के लिए यह खबर गर्व का कारण है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2025 (National Clean Air Survey) में प्रयागराज ने बड़ी छलांग लगाई है। दस लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में प्रयागराज पिछली बार 20वें स्थान पर था, लेकिन इस बार 7वें स्थान पर पहुँच गया है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि प्रशासनिक प्रयासों और नागरिक सहयोग से वायु प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

क्या है नेशनल क्लीन एयर सर्वेक्षण

स्वच्छ वायु सर्वेक्षण केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और पर्यावरण मंत्रालय द्वारा प्रतिवर्ष किया जाता है। इसमें देशभर के बड़े और छोटे शहरों की वायु गुणवत्ता, प्रदूषण नियंत्रण उपाय, नगर निकायों की कार्ययोजना और नागरिक सहभागिता जैसे कई बिंदुओं पर मूल्यांकन होता है। प्रयागराज ने इस बार कई मानकों पर अपेक्षा से अधिक अच्छा प्रदर्शन किया है।

प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में उठाए गए कदम

प्रयागराज नगर निगम और जिला प्रशासन ने पिछले दो वर्षों में कई ठोस कदम उठाए—

  • सड़क किनारे नियमित मशीनों से धूल की सफाई और पानी का छिड़काव
  • निर्माण स्थलों पर डस्ट कंट्रोल सिस्टम लागू करना।
  • पुराने डीजल वाहनों को धीरे-धीरे हटाने और CNG/इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना।
  • ग्रीन बेल्ट और शहरी वृक्षारोपण अभियान, जिसमें शहर के भीतर हजारों पौधे लगाए गए।
  • नागरिकों को प्रदूषण नियंत्रण के प्रति जागरूक करने के लिए स्कूलों और वार्ड स्तर पर अभियान

इन प्रयासों का असर अब साफ दिखाई देने लगा है।

हवा की गुणवत्ता में सुधार

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़े बताते हैं कि प्रयागराज का AQI (Air Quality Index) औसतन पिछले सालों की तुलना में 15–20% बेहतर हुआ है। खासतौर पर सर्दियों के मौसम में, जब प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुँच जाता था, इस बार सुधार दर्ज किया गया। धूल और धुएं का स्तर कम हुआ है, जिससे सांस और फेफड़ों की बीमारियों पर भी नियंत्रण में मदद मिली है।

जनता का योगदान

प्रशासनिक प्रयासों के साथ नागरिकों ने भी अपनी जिम्मेदारी निभाई। कई इलाकों में लोगों ने पॉलीथिन का उपयोग कम किया, सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल बढ़ाया और वृक्षारोपण कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी की। प्रयागराज विश्वविद्यालय और इलाहाबाद उच्च न्यायालय के छात्रों व कर्मचारियों ने भी स्वच्छ वायु अभियान में बड़ी भूमिका निभाई।

विशेषज्ञों की राय

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि प्रयागराज की रैंकिंग में सुधार केवल सरकारी प्रयासों का परिणाम नहीं है, बल्कि यह सामूहिक जागरूकता की मिसाल है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रोफेसर अजय मिश्रा ने कहा, “प्रयागराज का 20वें से 7वें स्थान पर आना बड़ी उपलब्धि है। अगर इसी तरह निरंतर प्रयास जारी रहे, तो आने वाले वर्षों में यह शहर देश के टॉप 5 स्वच्छ हवा वाले बड़े शहरों में शामिल हो सकता है।”

प्रशासन का बयान

जिलाधिकारी संजय खत्री ने कहा कि, “यह उपलब्धि प्रयागराज की जनता और प्रशासन के संयुक्त प्रयास का नतीजा है। हमारी प्राथमिकता स्वच्छ हवा, स्वच्छ जल और स्वच्छ परिवेश सुनिश्चित करना है। आने वाले समय में और भी ठोस कदम उठाए जाएंगे।”

नगर आयुक्त ने बताया कि 2025-26 में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों की संख्या बढ़ाई जाएगी, इलेक्ट्रिक बसों का संचालन और वृक्षारोपण अभियान तेज़ी से चलाए जाएंगे।

चुनौतियाँ अभी भी बरकरार

हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि प्रयागराज को अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना है। सर्दियों में पराली जलने और बाहरी प्रदूषकों के कारण हवा की गुणवत्ता प्रभावित होती है। औद्योगिक गतिविधियों और बढ़ते वाहनों का दबाव भी शहर के लिए चुनौती बना हुआ है।

उम्मीद की दिशा

इन सबके बावजूद, प्रयागराज का 7वें स्थान पर पहुँचना यह संकेत है कि शहर सही दिशा में आगे बढ़ रहा है। यह उपलब्धि न केवल प्रशासन के लिए, बल्कि हर नागरिक के लिए प्रेरणा है कि यदि संकल्प और प्रयास हों तो प्रदूषण जैसी गंभीर समस्या पर भी नियंत्रण पाया जा सकता है।