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दो नर चीतों के साथ बनेगा पहला “फाउंडिंग फैमिली”

आईबीएन, भोपाल। मध्यप्रदेश की महत्वाकांक्षी चीता परियोजना में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। कूनो राष्ट्रीय उद्यान की मादा चीता ‘धीरा’ (Dheera) को अब गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य स्थानांतरित करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। यहाँ उसका जोड़ा दो नर चीते प्रभाष और पावक से कराया जाएगा। वन्यजीव विशेषज्ञ इसे ‘फाउंडिंग फैमिली’ (स्थापित परिवार) की दिशा में ऐतिहासिक कदम मान रहे हैं।

प्रजनन क्षमता बढ़ाने की रणनीति

गांधी सागर में नर चीतों की मौजूदगी पहले से है। धीरा को वहाँ स्थानांतरित करने का उद्देश्य चीतों की संख्या में वृद्धि करना और स्वाभाविक प्रजनन चक्र को तेज़ करना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि धीरा और नर चीते सहजता से मिल जाते हैं, तो गांधी सागर परियोजना भारत में चीतों का दूसरा बड़ा सुरक्षित घर बन जाएगी।

तीन साल की उपलब्धियों के बाद नई पहल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पालपुर कूनो में 2022 में चीता परियोजना की शुरुआत की गई थी। तीन वर्षों में कूनो ने यह साबित किया कि भारतीय वातावरण चीतों के लिए अनुकूल है। अब जब वहाँ 25 चीते हैं, तो सरकार और वन विभाग उन्हें अन्य अभयारण्यों में भी सुरक्षित विस्तार देना चाहते हैं। धीरा का यह स्थानांतरण उसी दिशा में पहला प्रयोग है।

विशेषज्ञों की राय

वन्यजीव विशेषज्ञ मानते हैं कि यह कदम जोखिमपूर्ण जरूर है, लेकिन दीर्घकालिक सफलता की कुंजी भी साबित हो सकता है। नर और मादा चीतों का सहज मेल होना आवश्यक है। यदि ऐसा होता है तो भारत में चीता संरक्षण की कहानी नया मोड़ लेगी।

धीरा की खासियत

  • कूनो की सक्रिय और स्वस्थ मादा चीता
  • अब तक कई बार प्राकृतिक शिकार क्षमता का प्रदर्शन
  • प्रजनन आयु में प्रवेश कर चुकी
  • प्रोजेक्ट चीता की “उम्मीद की किरण”