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राज्य उड़न दस्ते ने खोली वन विभाग की लापरवाही की पोल, सवालों के घेरे में सीसीएफ और डीएफओ

गणेश पाण्डेय, भोपाल। नर्मदापुरम वन मंडल के इटारसी रेंज की छिपीखापा बीट से सामने आया अवैध कटाई का मामला वन विभाग के इतिहास का सबसे बड़ा कांड माना जा रहा है। ढाई करोड़ रुपये मूल्य की सागौन (गोल्डन टीक) की लकड़ी टिम्बर माफिया ने बेरोकटोक काट ली और जिम्मेदार अफसर महीनों तक निश्चिंत बैठे रहे। अब जब राज्य उड़न दस्ते ने मौके पर जाकर 1290 ठूंठ गिने और विस्तृत फैक्ट फाइल तैयार की, तब जाकर यह कांड सार्वजनिक हुआ। सवाल यह है कि जब 50 हजार तक की क्षति पर एसडीओ स्तर के अफसर पर कार्रवाई तय है, तो ढाई करोड़ की क्षति पर क्या मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) और डीएफओ जैसे बड़े अफसरों की जिम्मेदारी तय होगी?

शिकायत से शुरू हुआ मामला

छिपीखापा बीट की कटाई की शिकायत रिटायर्ड वन अधिकारी मधुकर चतुर्वेदी ने पीसीसीएफ संरक्षण को की थी। इससे पहले भी कटाई की जानकारी विभाग को मिल चुकी थी, लेकिन तत्कालीन संरक्षण शाखा के मुखिया मनोज अग्रवाल ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। जैसे ही विभाष ठाकुर ने पीसीसीएफ संरक्षण का कार्यभार संभाला, उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए उड़न दस्ते को मौके पर भेजा।

नौ महीने बाद जागा विभाग

हैरानी की बात यह है कि कटाई की शुरुआत नवंबर 2024 से हो चुकी थी, लेकिन विभाग ने नौ महीने तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। अब जाकर एसडीओ और रेंजर पर आरोपपत्र जारी करने की औपचारिकता निभाई जा रही है।

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राज्य उड़न दस्ते की रिपोर्ट

पीसीसीएफ संरक्षण विभाष ठाकुर के निर्देश पर राज्य उड़न दस्ते की टीम ने पांच दिनों तक कड़ी मेहनत कर कटाई की वास्तविकता उजागर की।

  • 9 सितम्बर 2025 को निरीक्षण में 116 सागौन और 14 सतकटा सहित कुल 130 ठूंठ गिने गए।
  • 10 सितम्बर 2025 को 294 सागौन और 6 सतकटा यानी 300 ठूंठ पाए गए।
  • 12 सितम्बर 2025 को पांच दलों ने 360 सागौन और 5 सतकटा यानी 365 ठूंठ दर्ज किए।
  • 13 सितम्बर 2025 को 401 सागौन और 7 सतकटा यानी 408 ठूंठ पाए गए।
  • 14 सितम्बर 2025 को 71 सागौन और 6 सतकटा यानी 77 ठूंठ गिने गए।

कुल मिलाकर 1242 सागौन और 38 सतकटा के ठूंठ दर्ज हुए। अनुमानित हानि ढाई करोड़ रुपये आंकी गई है।

https://indianbreakingnews.com/archives/75778
indianbreakingnews.com में प्रकाशित

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वन संरक्षक की चेतावनी भी अनसुनी

वन संरक्षक ने 1 फरवरी 2025 और 5 मई 2025 को डीएफओ नर्मदापुरम को पत्र लिखकर सतर्क किया था। बावजूद इसके न तो स्वयं मुआयना किया गया, न ही कोई सुरक्षा योजना बनाई गई। यही नहीं, इटारसी और आसपास के जंगलों में अवैध कटाई के साथ अवैध शिकार की घटनाएँ भी होती रहीं। 2 टाइगर और 5 तेंदुओं के शिकार की घटनाएँ सामने आईं, लेकिन डीएफओ और सीसीएफ न तो मौके पर पहुँचे, न ही किसी गिरोह को पकड़ने की ठोस कार्रवाई की गई।

अफसरों की जिम्मेदारी पर उठ रहे सवाल

मुख्य वन संरक्षक अशोक कुमार (अक्टूबर 2024 से पदस्थ) और डीएफओ मयंक गुर्जर (मार्च 2024 से पदस्थ) पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इनका दायित्व वनों और वन्यजीवों की सुरक्षा है, लेकिन उन्होंने न तो दौरे किए, न ही कटाई रोकने की योजना बनाई। परिणामस्वरूप टिम्बर माफिया ने इटारसी, सिवनी मालवा और बानापुरा रेंज में सागौन काटकर तस्करी कर दी।

निष्क्रियता ने बढ़ाया तस्करों का हौसला

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शुरुआती दौर में ही सतर्कता दिखाई जाती, तो इतनी बड़ी हानि रोकी जा सकती थी। लेकिन विभाग की निष्क्रियता ने तस्करों का हौसला इतना बढ़ा दिया कि उन्होंने एक के बाद एक रेंज को निशाना बनाना शुरू कर दिया।

अब सबसे बड़ा सवाल

ढाई करोड़ की हानि पर विभाग एसडीओ और रेंजर को तो कटघरे में खड़ा कर रहा है, लेकिन उच्च अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी या नहीं, यह सबसे बड़ा सवाल है। विभागीय नियमों के मुताबिक छोटी हानि पर भी कार्रवाई का प्रावधान है, तो इतने बड़े कांड पर महज औपचारिकता नहीं, बल्कि ठोस कदम की अपेक्षा है।