2025 में 23 वन अधिकारी होंगे रिटायर

पूर्व एमडी विभाष ठाकुर ने रोकी थी 1.45 करोड़ की फाइल, अब हटते ही तेजी से क्लियरेंस की कवायद – ईवाई ने खुद माना काम अधूरा छोड़ा

गणेश पाण्डेय, भोपाल। लघु वनोपज संघ में एक बड़ा पेमेंट विवाद गहराता जा रहा है। चर्चा है कि संघ जल्द ही एसीएस की खास मानी जाने वाली फर्म Ernst & Young LLP (ईवाई) को करीब सवा करोड़ रुपये का भुगतान करने वाला है। दिलचस्प यह है कि इस फर्म ने अनुबंध में तय काम पूरे ही नहीं किए, फिर भी फाइल को क्लियर कराने की तैयारी शुरू हो चुकी है।

जानकारी के मुताबिक, लघु वनोपज संघ और ईवाई के बीच 16 अगस्त 2022 को अनुबंध हुआ था। मकसद था—व्यवसाय प्रबंधन इकाई (BMU) की स्थापना, एमआईएस पोर्टल का डिजाइन और विकास, डेटा संग्रह व सत्यापन, साथ ही वन धन केंद्रों और प्राथमिक समितियों को अपग्रेड करना। अनुबंध के तहत हर तिमाही करीब 45 लाख रुपये का भुगतान ईवाई को किया जाना तय था।

मगर, संघ के तत्कालीन एमडी और पीसीसीएफ (संरक्षण) विभाष ठाकुर ने काम अधूरा पाए जाने पर करीब 1.45 करोड़ रुपये का भुगतान रोक दिया। ठाकुर का साफ कहना था—“काम पूरा नहीं हुआ तो पेमेंट नहीं।

पत्र में खुद स्वीकारा—काम अधूरा छोड़ा

अब ताज़ा मोड़ 20 जून 2025 के एक पत्र से आया है। ईवाई संस्था ने खुद माना है कि वे एसओडब्ल्यू (Scope of Work) के मुताबिक पूरा काम नहीं कर पाए। पत्र में साफ लिखा गया—आईटी पोर्टल पर एक अन्य टीम पहले से काम कर रही थी, इसलिए हमारी टीम इसे नहीं कर सकी। इसी आधार पर ईवाई ने 20 लाख रुपये कम लेने की सहमति जताई है।

यानी, फर्म ने खुद स्वीकार किया कि उन्होंने काम अधूरा छोड़ा, बावजूद इसके अब भी 1.25 करोड़ रुपये का भुगतान देने की तैयारी चल रही है।

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अधिकारी सवालों के घेरे में

इस अनुबंध पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं क्योंकि जिस समय यह समझौता हुआ, तब संघ 40 करोड़ रुपये तक का कारोबार अपने दम पर कर चुका था और कई अंतरराष्ट्रीय मेले भी सफलतापूर्वक आयोजित कर चुका था। ऐसे में बाहर से कंसल्टेंसी लेने की ज़रूरत क्यों पड़ी—यह सवाल कई वरिष्ठ अधिकारी उठा रहे हैं।

सेवानिवृत्त आईएफएस अधिकारियों का कहना है—“संघ का एमडी ढाई लाख रुपये का वेतन लेता है। अगर उसे काम कराने के लिए बाहर की कंपनी से मदद लेनी पड़े तो फिर उसकी एफिशिएंसी पर बड़ा सवाल खड़ा होता है।

इनका कहना

हां, काम नहीं करने पर मैंने पेमेंट रोका था। इस मामले में नए एमडी से पूछें।
विभाष ठाकुर, पूर्व एमडी एवं पीसीसीएफ संरक्षण

मैं संस्था को बुलाकर बात करूंगी। जो काम किया गया है, उसका भुगतान करना होगा।
समीता राजौरा, एमडी लघु वनोपज संघ