दक्षिण पन्ना में ड्रोन से निगरानी के दौरान कैमरे में कैद हुआ दुर्लभ नज़ारा
गणेश पाण्डेय, भोपाल। तकनीक और प्रकृति के अद्भुत संगम का एक मनमोहक दृश्य सोमवार को दक्षिण पन्ना वनमंडल में देखने को मिला। यहां जंगल में वृक्षारोपण कार्यों की निगरानी के लिए उड़ाए गए ड्रोन कैमरे ने एक ऐसा दुर्लभ क्षण कैद किया, जिसे देखकर वन अधिकारी भी आश्चर्यचकित रह गए।
दरअसल, दक्षिण पन्ना वनमंडल में पिछले कुछ महीनों से वृक्षारोपण स्थलों की गुणवत्ता और रखरखाव की निगरानी ड्रोन तकनीक के माध्यम से की जा रही है। इसी क्रम में जब मोहन्द्रा वन परिक्षेत्र में सहायक वन संरक्षक अंकुर गुप्ता ने निरीक्षण के दौरान ड्रोन उड़ाया, तो आसमान में उड़ते इस यंत्र ने जंगल के भीतर विचरण कर रहे एक तेंदुए की तस्वीर कैद कर ली।
तेंदुआ टकटकी लगाए देखता रहा ड्रोन
वन विभाग के अनुसार, ड्रोन कैमरा जब वृक्षारोपण क्षेत्र के ऊपर मंडरा रहा था, तभी नीचे से गुजरते तेंदुए की नजर अचानक ड्रोन पर पड़ी। वह कुछ देर तक वहीं ठिठक गया और उत्सुकता से ऊपर आसमान की ओर देखने लगा। ड्रोन की आवाज और चमकती लाइट्स को देखकर तेंदुए ने जैसे उस अनोखे यंत्र को परखने की कोशिश की।
काफी देर तक वह कैमरे की ओर टकटकी लगाए देखता रहा। यह दृश्य ड्रोन के कैमरे में कैद हो गया, जो अब वन विभाग के लिए एक दुर्लभ और मनमोहक रिकॉर्डिंग बन गई है।
तकनीक से पारदर्शिता और जैवविविधता की झलक
दक्षिण पन्ना वनमंडल में वृक्षारोपण की गुणवत्ता बढ़ाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से ड्रोन निगरानी की यह पहल की गई है। इस तकनीकी नवाचार से न केवल वृक्षारोपण कार्यों की निगरानी आसान हुई है, बल्कि वन्यजीवों की वास्तविक गतिविधियों का भी दस्तावेजीकरण संभव हुआ है।
ड्रोन द्वारा ली गई यह तस्वीर इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश के वनों में जैवविविधता अत्यंत समृद्ध और सशक्त है। वन अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के दृश्य यह भी दिखाते हैं कि तकनीक का सही उपयोग पर्यावरण संरक्षण में कितना प्रभावी हो सकता है।
वन्यजीव संरक्षण और तकनीकी नवाचार का संगम
वन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि ड्रोन तकनीक से निगरानी के दौरान वन्यजीवों के प्राकृतिक व्यवहार को बिना बाधित किए समझने का अवसर मिलता है।
दक्षिण पन्ना में तेंदुए की यह तस्वीर अब वन्यजीव संरक्षण और तकनीकी नवाचार के सफल मेल का प्रतीक बन गई है।
