गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश के जंगल महकमे में प्रशासनिक अराजकता का माहौल गहराता जा रहा है। अनुशासनहीन अफसरों पर समय पर कार्रवाई न होने से अब विभाग में अफसर बेलगाम होते जा रहे हैं। इसका ताज़ा उदाहरण दक्षिण सिवनी वन मंडल के सहायक वनमंडल अधिकारी (एसडीओ) योगेश पटेल हैं, जिन पर महिला कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने, पद का दुरुपयोग करने, और बिना अनुमति के विभागीय आदेश जारी करने के गंभीर आरोप लगे हैं।
वन महकमे में यह मामला तब चर्चा में आया जब एसडीओ पटेल ने वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) गौरव मिश्रा की पूर्व अनुमति के बिना उनके पदनाम की आधिकारिक मुद्रा (Seal) पर ‘फॉर’ लिखे बिना कई विभागीय पत्रों पर हस्ताक्षर किए और यहां तक कि एक तबादला आदेश भी जारी कर दिया।
इस अनुशासनहीनता पर वन संरक्षक, वृत सिवनी मधु वी. राज ने डीएफओ को पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांगा है। फिलहाल जांच की जिम्मेदारी एसडीओ राकेश गुरुदेव को सौंपी गई है। डीएफओ गौरव मिश्रा ने कहा कि “मैं जांच अधिकारी की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा हूं, उसी के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।”
सेवा आचरण नियमों का खुला उल्लंघन
वन विभाग सेवा आचरण नियम 1965 और मध्यप्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत वरिष्ठ अधिकारी की अनुमति के बिना पदनाम का उपयोग करना और आधिकारिक मुहर से आदेश जारी करना पद के दुरुपयोग और अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।
सूत्रों के अनुसार, मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंच चुका है और इसकी प्राथमिक जांच शुरू की जा रही है।
महिला कर्मचारी ने लगाई यौन उत्पीड़न की शिकायत
विभागीय गड़बड़ियों के साथ-साथ महिला उत्पीड़न के आरोप ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। एक महिला कर्मचारी ने शपथ पत्र के साथ शिकायत दी है कि एसडीओ पटेल रात में बार-बार फोन कर परेशान करते हैं, यहां तक कि “घर में क्या-क्या सामान है और खटिया की व्यवस्था रखना” जैसी बातें कहते हैं।
इस शिकायत की जानकारी अप्रैल 2025 में संरक्षण शाखा को दी गई थी, लेकिन वहां भी शिकायत को दबा दिया गया। बताया जाता है कि उस समय संरक्षण शाखा में पदस्थ एसडीओ, योगेश पटेल के मित्र थे, जिन्होंने जानबूझकर फाइल आगे नहीं बढ़ाई।
भ्रष्टाचार और दबाव के आरोप
एसडीओ पटेल पर भ्रष्टाचार और दलाली के कई आरोप भी सामने आए हैं —
- लकड़ी तस्करी में मिलीभगत: आम, अर्जुन, सागौन जैसी बहुमूल्य लकड़ी की कटाई में फर्जी टी.पी. (ट्रांजिट पास) जारी करना।
- रिश्वतखोरी: प्रति घनमीटर ₹20,000 की अवैध वसूली की बात सामने आई है।
- बजट का दुरुपयोग: वानिकी कार्यों में केवल 30-40% राशि खर्च कर बाकी राशि को भोपाल भेजने का आरोप।
- मानसिक उत्पीड़न से मौत: वनकर्मी अजय जैन को अवैध वसूली का विरोध करने पर इतना दबाव डाला गया कि उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ और उनकी मृत्यु हो गई।
विभागीय अफसरों की प्रतिक्रिया
गौरव मिश्रा, डीएफओ दक्षिण सिवनी ने कहा —
“पद के दुरुपयोग के मामले में जांच अधिकारी गुरुदेव की रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।”
राकेश गुरुदेव, जांच अधिकारी ने कहा —
“महिला समेत वन कर्मियों को प्रताड़ित करने और डीएफओ की गैर मौजूदगी में आदेश जारी करने के मामले में एक दिन में रिपोर्ट प्रस्तुत कर दूंगा।”
आरोपी एसडीओ का पक्ष
योगेश पटेल, एसडीओ दक्षिण सिवनी ने कहा —
हां, ट्रांसफर के मामले गलती से आदेश पर हस्ताक्षर हो गए। बाद में DFO से अनुमति ले ली है। DFO ने प्रकरण नस्तीबद्ध के लिए लिखा है। जहां तक महिला वन कर्मी और अन्य वन कर्मियों के साथ हो भद्र व्यवहार और अश्लील बातों की तो मैं अच्छे घर से आता हूं। इसलिए, भाषा की मर्यादा को जानता भी हूं। हां, यह जरूर है कि ऊंची आवाज में कभी-कभी बात कर लेता हूं।
वन विभाग में बढ़ती अराजकता पर सवाल
इस मामले ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि वन विभाग में अनुशासनहीन अफसरों पर समय पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?
अगर अफसरों की मनमानी और भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लगा, तो जंगल महकमे की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होंगे।
