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मुख्यमंत्री ने दी राहत, अगले ही दिन विभाग ने दिया उलटा आदेश

आईबीएन, भोपाल। एक ओर बेमौसम बारिश ने मध्य प्रदेश के किसानों की फसलों को तबाह कर दिया है, वहीं अब बिजली विभाग के नए आदेश ने उनकी परेशानियां और बढ़ा दी हैं।
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि किसानों को एक दिन में 10 घंटे से अधिक बिजली दी गई, तो संबंधित ऑपरेटर से लेकर जीएम (महाप्रबंधक) तक की सैलरी काटी जाएगी।

यह आदेश कंपनी के चीफ जनरल मैनेजर (CGM) एके जैन ने जारी किया है और इसकी कॉपी भोपाल, ग्वालियर, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, रायसेन, हरदा, विदिशा, अशोकनगर, गुना, भिंड, मुरैना, श्योपुर, शिवपुरी और दतिया जिलों के अधिकारियों को भेजी गई है।

गौरतलब है कि इसी से एक दिन पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की घोषणा की थी।
उन्होंने कहा था कि घरेलू, गैर-घरेलू, कृषि और औद्योगिक श्रेणी के उपभोक्ताओं को तीन माह या उससे अधिक के बकाया बिलों पर सरचार्ज में छूट दी जाएगी। लेकिन इसके अगले ही दिन बिजली कंपनी ने यह नया आदेश जारी कर दिया।

किसानों पर दोहरी मार: फसलें बर्बाद और बिजली की पाबंदी

प्रदेश में हाल ही में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से फसलें बर्बाद हो गईं। किसानों को पहले ही भारी नुकसान झेलना पड़ा है, ऐसे में बिजली विभाग का यह आदेश उनके लिए नई मुसीबत बन गया है।
किसानों का कहना है कि जब खेतों में सिंचाई की सबसे ज्यादा जरूरत है, तब बिजली की सप्लाई सीमित करना कृषि संकट को और गहरा देगा।

बिजली विभाग का सख्त आदेश

आदेश में साफ लिखा गया है कि यदि किसी कृषि फीडर पर 10 घंटे से अधिक बिजली दी जाती है, तो यह नियम उल्लंघन माना जाएगा।

  • पहली बार उल्लंघन पर ऑपरेटर की एक दिन की सैलरी काटी जाएगी।
  • लगातार दो दिन ऐसा होने पर जूनियर इंजीनियर की एक दिन की सैलरी कटेगी।
  • लगातार पाँच दिन नियम तोड़ने पर एक्जीक्यूटिव इंजीनियर की सैलरी कटेगी।
  • और यदि सात दिन तक प्रतिदिन 10 घंटे से अधिक बिजली दी जाती है, तो डीजीएम (DGM) या जीएम (GM) का एक दिन का वेतन काटा जाएगा।

बिजली आपूर्ति की निगरानी कृषि फीडर मीटरों के समय रीडिंग से की जाएगी। इसमें प्रतिदिन 15 मिनट तक की त्रुटि सीमा तय की गई है। इससे अधिक बिजली देने पर इसे नियम का उल्लंघन माना जाएगा।

‘हेडक्वार्टर को भेजी जाएगी रिपोर्ट’

आदेश में यह भी कहा गया है कि यदि खराब मौसम, मिट्टी की नमी या तकनीकी कारणों से लोड बढ़ता है, तब भी 10 घंटे से अधिक बिजली नहीं दी जानी चाहिए।
सभी अधीक्षण अभियंता, एक्जीक्यूटिव, असिस्टेंट और जूनियर इंजीनियर को आदेश का पालन सुनिश्चित करना होगा। किसी भी उल्लंघन की रिपोर्ट हेडक्वार्टर को भेजी जाएगी।

बकाया बिल चुकाने पर छूट की योजना

1 नवंबर को सीएम मोहन यादव ने ऊर्जा विभाग की ‘समाधान योजना 2025-26’ की शुरुआत की थी। उन्होंने कहा था कि उपभोक्ता बकाया राशि को एकमुश्त या छह किस्तों में चुका सकते हैं, और योजना के तहत सरचार्ज पर एक करोड़ रुपये तक की छूट दी जा सकती है। कार्यक्रम में ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर, अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, एमपी पॉवर मैनेजमेंट कंपनी के एमडी अविनाश लवानिया और मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के एमडी क्षितिज सिंघल भी मौजूद थे।

किसानों में नाराजगी, कहा—“हमारी हालत नहीं समझ रही सरकार”

किसानों का कहना है कि फसलें पहले ही बारिश से चौपट हो चुकी हैं। ऐसे में सीमित बिजली आपूर्ति का मतलब है — खेतों में सिंचाई रुक जाना और उत्पादन घट जाना। उन्होंने मांग की है कि सरकार किसानों के हालात को देखते हुए बिजली आपूर्ति पर लगाए गए समयबद्ध प्रतिबंध को तुरंत वापस ले।