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उरी 
आतंकी साजिश का पर्दाफाश होने के बाद अब जम्मू पुलिस जल्द ही किरायेदारों को लेकर नया मुहिम शुरू करने जा रही है. किरायेदार सत्यापन प्रक्रिया को सुगम बनाने और लोगों की थाने आने-जाने की आवश्यकता को कम करने के लिए एक विशेष वेब पोर्टल शुरू करने जा रही है. जम्मू के एसएसपी जोगिंदर सिंह ने कहा कि वर्तमान मैनुअल प्रणाली में हर किरायेदार और मकान मालिक को थाने में फिजिकली उपस्थित होना पड़ता है, जिससे अक्सर असुविधा होती है. उन्होंने आगे बताया कि हम इस भौतिक संपर्क को खत्म करने पर काम कर रहे हैं. एक उपयोगकर्ता-अनुकूल किरायेदार सत्यापन पोर्टल विकसित किया जा रहा है और जल्द ही शुरू किया जाएगा.

एसएसपी जोगिंदर सिंह ने बताया कि पोर्टल शुरू होने के बाद न तो किरायेदार और न ही मकान मालिक को पुलिस स्टेशन आने की आवश्यकता होगी. सत्यापन फार्म ऑनलाइन जमा किए जा सकेंगे और पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करेगी. बता दें क‍ि अक्‍सर ऐसे मामले सामने आते रहे हैं कि आतंकवादी किरायेदार के रूप में रह रहे हैं, लेकिन उनके बारे में समय रहते पता नहीं चल पाता है. एसएसपी ने यह भी कहा कि दुकानदारों और कंपनियों द्वारा कर्मचारियों का सत्यापन करना डीसीपी के आदेशों के तहत अनिवार्य है. उन्होंने कहा कि हर दुकानदार या कंपनी को अपने कर्मचारियों का सत्यापन सुनिश्चित करना होगा. यह अनिवार्य है. सोशल मीडिया पर गलत सूचना के प्रसार पर एसएसपी ने कहा कि पुलिस ने सरकार से आवश्यक नियम लागू करने का आग्रह किया है.
कैसे विस्‍तार करता गया अल-फलाह ट्रस्‍ट

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जवाद अहमद सिद्दीकी को गिरफ्तार किया है. यह गिरफ्तारी पीएमएलए-2002 की धारा 19 के तहत की गई. ईडी ने इस मामले में अपनी जांच की शुरुआत दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा की ओर से दर्ज की गई दो एफआईआर के आधार पर की थी. एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि अल-फलाह विश्वविद्यालय, फरीदाबाद ने छात्रों और अभिभावकों को धोखा देने के लिए धोखाधड़ीपूर्ण तरीके से एनएएसी मान्यता का दावा किया था, जबकि विश्वविद्यालय को यूजीसी मान्यता प्राप्त नहीं थी. ईडी की जांच में यह सामने आया कि अल-फलाह ट्रस्ट (जो 1995 में स्थापित हुआ था) के पास पर्याप्त वित्तीय संसाधनों का अभाव था, लेकिन इसके बावजूद इसने 1990 के दशक से लेकर अब तक जबरदस्त विस्तार किया. जांच में यह भी पाया गया कि ट्रस्ट ने अपनी आय को पारिवारिक संस्थाओं में ट्रांसफर किया और इसके लिए निर्माण तथा खानपान के ठेके अपने परिवार के सदस्य संस्थाओं को दिए.

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