गणेश पाण्डेय, भोपाल। टीकमगढ़ जिले के कारी वन क्षेत्र में अवैध खनन के मामले में वन विभाग ने सख्त कदम उठाया है। विभाग ने यहां चल रहे खनन कार्य पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है और मध्यप्रदेश खनिज निगम के स्थानीय अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया है।
क्या है पूरा मामला?
कारी वन क्षेत्र में डायस्फोर और पायरोफिलाइट जैसे कीमती खनिज भारी मात्रा में मौजूद हैं। इनकी खुदाई के लिए वर्ष 1999 में वन विभाग ने खनिज निगम के साथ 60 साल का अनुबंध किया था। इसके तहत निगम को 5 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन की अनुमति मिली थी।

लेकिन आगे चलकर खनिज निगम ने खदान को ओम कंस्ट्रक्शन नाम की कंपनी को सौंप दिया। बताया जा रहा है कि इस कंपनी के पास खनिज भंडारण का लाइसेंस भी नहीं था। कंपनी ने काम को पेटी कांट्रेक्ट पर एक अन्य फर्म गजानन कंस्ट्रक्शन को दे दिया, जिससे खदान के संचालन पर नियंत्रण कमजोर हो गया।
अनियमितताएँ उजागर होने पर हरकत में आया विभाग
खदान प्रबंधन में गड़बड़ियाँ बढ़ती गईं और पेटी कांट्रेक्टर ने अधिक मुनाफा कमाने के लिए स्वीकृत सीमा से बाहर भी खुदाई शुरू कर दी। यह मामला विधानसभा तक पहुंच गया, जहां कांग्रेस विधायक यादवेंद्र सिंह ने सवाल उठाए। इसके बाद वन विभाग ने जांच शुरू की।
जांच में पाया गया कि करीब 2.62 हेक्टेयर वन क्षेत्र में अवैध रूप से खुदाई और अतिक्रमण किया गया है। इस पर टीकमगढ़ के डीएफओ राजाराम परमार ने खनिज निगम के स्थानीय अधिकारियों के खिलाफ भारतीय वन अधिनियम की धारा 26(1)(ज) के तहत केस दर्ज कराया।
खनन और परिवहन दोनों पर रोक

डीएफओ परमार ने स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वीकृत खदान से खनन और खनिज परिवहन दोनों पर पूरी तरह रोक रहेगी। साथ ही खदान का नया सीमांकन कराने को कहा गया है, जिसके लिए 24 नवंबर तक की समय-सीमा दी गई है। जांच के दौरान पाया गया कि पुराने सीमांकन के लिए लगाए गए मुनारे गायब मिले।
जांच में भी गड़बड़ी के आरोप
सूत्रों के अनुसार, वन विभाग की जांच में अवैध खनन को कम आंकने की कोशिश की गई। अतिक्रमण तो दर्ज किया गया, लेकिन अवैध खुदाई का उल्लेख नहीं किया गया। माना जा रहा है कि ऐसा करने से संबंधित कंपनी पर लगने वाला भारी जुर्माना टल सकता था।
कागजों पर सड़क बनाने की तैयारी
खनिज ढुलाई के लिए ठेकेदार ने बीट नंबर 15 में खरंजा और मुरम की सड़क बनाई थी। बताया जा रहा है कि वन विभाग ने इसी सड़क को प्रस्तावित नई सड़क बताकर मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा, जो स्वीकृत भी हो गया। अब कागजों में नई सड़क बनने की तैयारी है।
डीएफओ परमार का पक्ष
डीएफओ राजाराम परमार ने किसी तरह की अनियमितता से इंकार किया। उनका कहना है कि स्वीकृत बजट से दूसरी बीट में सड़क बननी है। अवैध खनन के सवाल पर उन्होंने कहा कि अतिक्रमित क्षेत्र में पुराना मलबा पड़ा है, लेकिन यदि खुदाई के ठोस सबूत मिलते हैं तो कार्रवाई की जाएगी।
कीमती खनिजों पर माफिया की नजर
डायस्फोर और पायरोफिलाइट बेहद मूल्यवान खनिज हैं—
- औद्योगिक ग्रेड डायस्फोर: 6,000–7,000 रुपये प्रति टन
- रत्न ग्रेड डायस्फोर: 42,000 से 1.68 लाख रुपये प्रति कैरट
- पायरोफिलाइट: भारत में 5,000–10,000 रुपये प्रति टन, विदेशों में 34,000 रुपये प्रति टन तक
इनका इस्तेमाल सिरेमिक, टाइल, रिफ्रैक्टरी और पेंट उद्योगों में होता है। इतने कीमती खनिजों के बड़े भंडार होने के कारण इस क्षेत्र पर खनन माफिया की नजर हमेशा बनी रहती है।
बुंदेलखंड में खनिज संपदा का बड़ा खजाना
भूवैज्ञानिकों के मुताबिक टीकमगढ़, छतरपुर, दमोह और पन्ना जिलों में डायस्फोर और पायरोफिलाइट का विशाल भंडार है। खासतौर पर कारी, जतारा और मोहनगढ़ क्षेत्रों का खनिज बेहद उच्च गुणवत्ता का माना जाता है।
