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आईबीएन, बैतूल। खेती-किसानी की बदहाली के बीच एक सकारात्मक पहल सामने आई है। द पाई फाउंडेशन ने 31 मई 2026 को बैतूल जिले के घोड़ाडोंगरी जनपद पंचायत अंतर्गत सूखाढाना ग्राम पंचायत स्थित पीएलएस इंटरनेशनल स्कूल में किसान पाठशाला का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में सूखाढाना क्षेत्र के अनुसूचित जनजाति वर्ग के महिला एवं पुरुष किसानों ने बड़ी संख्या में शिरकत की।

रासायनिक खेती के दुष्प्रभाव, घटती जमीन की उर्वरता और किसानों की कमजोर आर्थिक स्थिति के बीच यह पाठशाला किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई। कार्यक्रम का मकसद सिर्फ जानकारी देना नहीं, बल्कि किसानों को स्थायी और टिकाऊ कृषि की ओर व्यावहारिक रूप से मोड़ना था।

लोकेश सोनी ने बताया — कैसे दोगुनी होगी किसान की आमदनी

फाउंडेशन के निदेशक लोकेश सोनी ने किसानों को फाउंडेशन के अब तक के कार्यों और आगामी योजनाओं से विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि फाउंडेशन का लक्ष्य किसानों को सिर्फ खेती का ज्ञान देना नहीं, बल्कि उनकी आय को वास्तविक रूप से दोगुना करना है। इसके लिए उन्होंने एक विस्तृत कार्ययोजना किसानों के सामने रखी।

सोनी ने किसानों से आग्रह किया कि वे आपस में एकजुट होकर खेती के कार्यों में सहयोग करें। उन्होंने जल संरक्षण को खेती की सबसे बड़ी जरूरत बताते हुए कहा कि पानी बचाए बिना टिकाऊ खेती संभव नहीं है।

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उद्यानिकी अधिकारी ने खोला सरकारी योजनाओं का खजाना

शाहपुर स्थित उद्यानिकी विभाग के अधिकारी रामलाल इवने ने किसानों को राज्य शासन की उद्यानिकी विभाग की तमाम योजनाओं की बारीकी से जानकारी दी। अधिकांश किसान इन योजनाओं से अनजान थे, ऐसे में यह सत्र उनके लिए विशेष रूप से उपयोगी रहा।

इवने ने बताया कि खेती के साथ-साथ पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसी सहायक गतिविधियां अपनाकर किसान अपनी आय के नए स्रोत तैयार कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार इन सभी क्षेत्रों में अनुदान और तकनीकी सहायता दे रही है, जिसका किसानों को भरपूर लाभ उठाना चाहिए।

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पूर्व उपाध्यक्ष ने जमीनी हकीकत से कराया रूबरू

घोड़ाडोंगरी जनपद पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष विश्वास जी का संबोधन कार्यक्रम का सबसे व्यावहारिक हिस्सा रहा। उन्होंने किताबी ज्ञान से परे जाकर किसानों के सामने आने वाली तृणमूल स्तर की असली समस्याओं को बेबाकी से सामने रखा।

उन्होंने जैविक खेती अपनाने की पूरी प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाया — शुरुआत कैसे करें, किन दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है और उनसे कैसे निपटें। अपने व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर उन्होंने कहा कि शुरुआती कठिनाइयों के बाद जैविक खेती फायदे का सौदा साबित होती है।

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डॉ. मनीष मिश्रा ने चेताया — रासायनिक खेती बर्बाद कर रही है जमीन और सेहत

कार्यक्रम के समापन सत्र में डॉ. मनीष मिश्रा ने रासायनिक खेती के खतरों पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने तथ्यों के साथ बताया कि अंधाधुंध रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के उपयोग से न केवल जमीन की उर्वरता खत्म हो रही है, बल्कि किसानों और उपभोक्ताओं की सेहत पर भी गंभीर असर पड़ रहा है।

उन्होंने स्थायी कृषि को भविष्य की खेती बताते हुए किसानों से संगठित होकर काम करने का आह्वान किया और कहा कि इसी रास्ते से किसान अपनी जीविका को सुरक्षित करने के साथ-साथ अपनी आय भी बढ़ा सकते हैं।