एयू खान को राज्य वन विकास निगम की कमान, पुष्पोतंत धिमान को विकास एवं अनुसंधान का अतिरिक्त प्रभार, डॉ. समीता राजोर और मनोज अग्रवाल को भी नई जिम्मेदारियां
गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार के वन विभाग ने वरिष्ठ अधिकारियों के तबादलों की बड़ी सूची जारी की है। विभाग ने आज जारी आदेश में भारतीय वन सेवा के पांच अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं। ये तबादले तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं। इस फेरबदल के पीछे विभागीय कार्यों में तेजी लाना और अधिकारियों के अनुभव का बेहतर उपयोग करना प्रमुख उद्देश्य बताया गया है।
जिन अधिकारियों का तबादला किया गया है उनमें एयू खान, विभाष कुमार ठाकुर, पुष्पोतंत धिमान, डॉ. समीता राजोर और मनोज कुमार अग्रवाल शामिल हैं। सभी को नई पोस्टिंग के साथ अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं।
तबादलों का विवरण इस प्रकार है:
एयू खान (1989 बैच)
अब तक वे प्रमुख मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य कार्यालय अधिकारी (कैम्पा), भोपाल के पद पर कार्यरत थे। अब उन्हें प्रमुख मुख्य वन संरक्षक/ प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम, भोपाल बनाया गया है।
विभाष कुमार ठाकुर (1990 बैच)
वे प्रमुख मुख्य वन संरक्षक/ प्रबंध संचालक, एमपी राज्य लघुवनोपज संघ, भोपाल में पदस्थ थे। अब वे मुख्य वन संरक्षक (संरक्षण) मुख्यालय भोपाल में नई जिम्मेदारी संभालेंगे। यह पोस्टिंग प्रतिनियुक्ति से वापसी के रूप में दी गई है।
पुष्पोतंत धिमान (1992 बैच)
अब तक प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (ग्रीन इंडिया मिशन), भोपाल के रूप में कार्यरत थे। अब उन्हें प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (विकास), भोपाल मुख्यालय तथा ग्रीन इंडिया मिशन, अनुसंधान विस्तार एवं लोक वानिकी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
डॉ. समीता राजोर (1992 बैच)
अब तक वे प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (मानव संसाधन विकास), भोपाल मुख्यालय में कार्यरत थीं। अब उन्हें प्रमुख मुख्य वन संरक्षक/ प्रबंध संचालक, एमपी राज्य लघुवनोपज संघ, भोपाल के पद पर नियुक्त किया गया है। यह प्रतिनियुक्ति आधारित पद है।
मनोज कुमार अग्रवाल (1993 बैच)
अब तक वे प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (कार्य योजना एवं वन भू-अभिलेख), भोपाल में पदस्थ थे। अब उन्हें प्रमुख मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य कार्यालय अधिकारी (कैम्पा), भोपाल तथा कार्य योजना वन भू-अभिलेख का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
वन विभाग के इस निर्णय से विभागीय कार्यों में नये सिरे से ऊर्जा आएगी। अधिकारियों के अनुभव का लाभ लेते हुए विभिन्न योजनाओं को तेजी से क्रियान्वित किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है। साथ ही, विभागीय पुनर्गठन की दिशा में यह एक अहम कदम माना जा रहा है।
