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कहा—शब्दों की चूक से उपजा विवाद पीड़ादायक, भारतीय सेना के प्रति सम्मान अडिग

गणेश पाण्डेय, भोपाल। मंत्री विजय शाह ने एक बार फिर मीडिया के सामने आकर अपने बयान को लेकर सार्वजनिक रूप से क्षमा याचना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी महिला अधिकारी, भारतीय सेना या समाज के किसी भी वर्ग का अपमान करना नहीं था। मंत्री ने कहा कि देशभक्ति के उत्साह, उत्तेजना और आवेश में निकले उनके शब्द उनकी वास्तविक भावना के अनुरूप नहीं थे।

उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले भी कई बार अपनी स्थिति स्पष्ट की है और आज फिर दोहरा रहे हैं कि उनके मन में किसी प्रकार की दुर्भावना नहीं थी। उन्होंने स्वीकार किया कि शब्दों की चूक हुई, जिसके लिए उन्होंने अंतःकरण से क्षमा याचना की है—कई बार की है और आज फिर कर रहे हैं।

‘यह विवाद मेरे लिए अत्यंत पीड़ादायक’

विजय शाह ने कहा कि उनकी त्रुटि के कारण उत्पन्न विवाद उनके लिए अत्यंत पीड़ादायक रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि उनकी भावना को सही संदर्भ में समझा जाएगा। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहते हुए शब्दों की मर्यादा और संवेदनशीलता अत्यंत आवश्यक है और इस घटना से उन्होंने आत्ममंथन किया है।

जिम्मेदारी स्वीकार, भविष्य में संयम का आश्वासन

मंत्री ने कहा कि वे इस प्रकरण की जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं और इससे सबक लिया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में अपनी वाणी पर नियंत्रण रहेगा और ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक पद पर रहते हुए शब्दों का प्रभाव व्यापक होता है, इसलिए अतिरिक्त सतर्कता आवश्यक है।

भारतीय सेना से बिना शर्त क्षमा याचना

अपने वक्तव्य के अंत में मंत्री विजय शाह ने कहा कि वे इस प्रकरण से आहत सभी नागरिकों से, विशेषकर भारतीय सेना से, बिना किसी शर्त के पुनः क्षमा याचना करते हैं। उन्होंने दोहराया कि सेना के प्रति उनके मन में सदैव अत्यंत सम्मान रहा है और रहेगा।

उल्लेखनीय है कि इस प्रकरण से जुड़े एक याचिकात्मक पहलू पर सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी माह में टिप्पणी की थी। शीर्ष अदालत ने उस समय राज्य सरकार से संबंधित प्रक्रिया पर समयबद्ध निर्णय लेने को कहा था।
हालांकि, यह टिप्पणी न्यायिक प्रक्रिया के संदर्भ में थी और आज मंत्री द्वारा दी गई माफी तथा बयान से उसका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।