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द्वितीय अनुपूरक में 500+ योजनाएं शामिल, फंड के नाम पर सिर्फ टोकन मनी

गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार के द्वितीय अनुपूरक बजट ने विकास योजनाओं का एक ऐसा मॉडल सामने रखा है, जिसमें योजनाओं की संख्या और लागत तो हजारों करोड़ की है, लेकिन बजट में फिलहाल उनके लिए सिर्फ 100-100 रुपए का प्रावधान किया गया है। विधानसभा से पारित 13,476 करोड़ रुपए के द्वितीय अनुपूरक बजट में लोक निर्माण विभाग से जुड़े 500 से अधिक सड़क, पुल, फ्लाईओवर, आरओबी और भवन निर्माण प्रोजेक्ट शामिल किए गए हैं।

अगर इन सभी योजनाओं को पूरी तरह लागू किया जाए, तो सरकार पर 25 हजार करोड़ रुपए से अधिक का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। फिलहाल सरकार ने इन योजनाओं को सिर्फ प्रतीकात्मक राशि देकर “घोषित” किया है और वास्तविक फंडिंग को आने वाले मुख्य बजट पर टाल दिया है।

नेताओं की मांग पर बनी योजनाएं

इन योजनाओं को मंत्रियों, विधायकों और सत्तारूढ़ दल से जुड़े जनप्रतिनिधियों की मांग पर शामिल किया गया है। विधानसभा के शीतकालीन सत्र में डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा द्वारा पेश किए गए इस अनुपूरक बजट को सदन की मंजूरी भी मिल चुकी है, लेकिन जमीन पर काम शुरू होने से पहले फंड की व्यवस्था अब भी अधर में है।

ये हैं बड़े और चर्चित प्रोजेक्ट

सरकार ने जिन प्रमुख योजनाओं को बजट में शामिल किया है, उनमें अशोकनगर बायपास (व्हाया गुना स्टेट हाईवे-20) शामिल है, जिसकी अनुमानित लागत 100 करोड़ रुपए है, लेकिन बजट में सिर्फ 100 रुपए रखे गए हैं।
इसी तरह कांजीपुरा-तराना टू-लेन सड़क के लिए 168.89 करोड़, सुरजनपुर केनाल से मिरघान मार्ग (कॉलेज रोड) 46 किमी के लिए 143.83 करोड़, रीवा शहर में कॉलेज चौराहे पर फ्लाईओवर के लिए 165.88 करोड़ की लागत तय की गई है, जबकि फंड नाम मात्र का है।

जबलपुर में ग्रेनेडियर चौक से साईं मंदिर शाह नाला तक फ्लाईओवर 349.54 करोड़,
उज्जैन में निकास चौराहे से इंदौर गेट तक टू-लेन फ्लाईओवर 150 करोड़,
और चिमनमंडी चौराहा से इंदौर गेट तक फोर-लेन सड़क के लिए 750 करोड़ रुपए की योजना शामिल है, लेकिन बजट में इनके सामने भी सिर्फ 100 रुपए दर्ज हैं।

भोपाल में ज्यूडिशियल एकेडमी तिराहे से अकादमी तक फोर-लेन सड़क 50 करोड़,
मंदसौर में आवरा से आवरी के बीच पुल-पुलिया निर्माण 262 करोड़,
दमोह-पथरिया बायपास से गढ़ाकोटा तक फोर-लेन 195.50 करोड़,
डिंडौरी में नर्मदा पुल (मूसरघाट-शहडोल मार्ग) 145 करोड़ की लागत से प्रस्तावित है।

इसके अलावा दिमनी नहर मार्ग (148 करोड़), नगरा-सूरजनगर मार्ग (160 करोड़),
ग्वालियर एयरपोर्ट फोर-लेन (120 करोड़),
परसौना-माढ़ा फोर-लेन (145 करोड़) और परसौना-बरगवां फोर-लेन (139 करोड़) जैसी योजनाएं भी इसी सूची में हैं।

छोटे काम, वही हाल

छोटी लेकिन जरूरी योजनाओं की स्थिति भी अलग नहीं है।
भीकनगांव-झिरन्या मार्ग पर पुल (37.50 करोड़),
जयसिंहनगर में ओदारी नदी पर पुल (13.88 करोड़),
उमरिया में सोन नदी पर पुल (44.77 करोड़),
ग्राम बिजौरी-भमरहा पुल (31.65 करोड़),
नौढ़िया-प्रहलाद मार्ग पर ओड्डा नदी पुल (4 करोड़),
उज्जैन में रामगढ़-बिहारिया मार्ग पुल (21.50 करोड़),
पठारी-हनोता-विसरई पुल (18.50 करोड़),
और डबरा-नरवर हाईवे पर सिंध नदी पुल (40 करोड़) की योजनाएं शामिल हैं।

भवन निर्माण की बात करें तो सांची में सर्किट हाउस (8 करोड़),
वीरसिंहपुर विश्राम गृह में दो कमरे (1.25 करोड़),
नीमच के रामपुरा में रेस्ट हाउस (2.65 करोड़),
उन्हेल में विश्राम गृह (4.15 करोड़) और
श्योपुर में एमपी-राजस्थान सीमा पर दो उच्च स्तरीय पुल (64 करोड़) भी इसी बजट में जोड़े गए हैं।

जहां नहीं दिखाई कंजूसी

जहां इन 500 से अधिक योजनाओं के लिए सरकार ने टोकन मनी का रास्ता अपनाया है, वहीं
पंचायत अनुदान (398 करोड़),
15वें वित्त आयोग की राशि (597 करोड़),
बरगी नहर परियोजना (100 करोड़),
इंदिरा सागर डैम (56.46 करोड़),
स्मार्ट पीडीएस योजना (104 करोड़),
उपार्जन संस्थाओं को ऋण-अग्रिम (2000 करोड़) और
एमएसएमई रैम्प परियोजना (16.36 करोड़) के लिए भरपूर फंड दिया गया है।

आगे क्या?

अब सबकी निगाहें आगामी मुख्य बजट पर टिकी हैं। वहीं यह तय होगा कि ये योजनाएं सिर्फ कागजों में दर्ज नाम बनकर रहेंगी या वास्तव में सड़कों, पुलों और फ्लाईओवर के रूप में जमीन पर उतरेंगी। फिलहाल मध्यप्रदेश में विकास की तस्वीर करोड़ों की योजनाओं और 100 रुपए की हकीकत के बीच अटकी नजर आ रही है।