एमएफपी पार्क बरखेड़ा पठानी में कार्रवाई से मचा हड़कंप, खरीदी और टेंडर प्रक्रिया भी जांच के घेरे में
गणेश पाण्डेय, भोपाल। लघु वनोपज संघ की प्रबंध संचालक कमोलिका मोहन्ता ने एमएफपी पार्क बरखेड़ा पठानी में लंबे समय से सामने आ रही अनियमितताओं और प्रशासनिक विवादों पर बड़ी कार्रवाई करते हुए उप प्रबंधक (उत्पादन) एवं प्रभारी एसडीओ सुनीता अहिरवार को आरोप पत्र जारी कर दिया है। इसके साथ ही एमएफपी पार्क की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) गीतांजलि जे. को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। कार्रवाई के दौरान अधिकारियों ने उप प्रबंधक के कार्यालय का ताला खुलवाकर पंचनामा तैयार किया तथा खरीदी और अन्य कार्यों से जुड़े दस्तावेज जब्त किए। विभागीय सूत्रों के अनुसार पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है।
लंबे समय से लंबित शिकायतों पर हुई कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार एमएफपी पार्क बरखेड़ा पठानी में खरीदी, उत्पादन और निर्माण कार्यों में अनियमितताओं की शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं। पूर्व प्रबंध संचालक विभाष ठाकुर के कार्यकाल में भी सुनीता अहिरवार के विरुद्ध जांच प्रारंभ कर तत्कालीन एसीएफ मणिशंकर मिश्रा को जांच अधिकारी बनाया गया था, लेकिन आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के कारण जांच पूरी नहीं हो सकी। बाद में अधिकारियों के स्थानांतरण के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पाया। वर्तमान प्रबंध संचालक कमोलिका मोहन्ता ने शिकायतों की समीक्षा के बाद विभागीय कार्रवाई शुरू की।
आरोप पत्र लेने से इंकार, कार्यालय से जब्त किए गए दस्तावेज
बताया गया है कि आरोप पत्र जारी होने की जानकारी मिलने के बाद सुनीता अहिरवार अवकाश पर चली गईं और आरोप पत्र लेने से इंकार कर दिया। इसके बाद विभाग ने आरोप पत्र उनके आवासीय पते पर भेजा। साथ ही एमएफपी पार्क स्थित उनके कार्यालय का ताला खुलवाकर पंचनामा तैयार किया गया तथा खरीदी और अन्य अभिलेखों को जब्त कर जांच के लिए सुरक्षित रखा गया। इसी बीच सीईओ गीतांजलि जे. ने सुनीता अहिरवार की सेवाएं मुख्यालय वापस करने का प्रस्ताव भी भेजा है। सूत्रों का दावा है कि इस कार्रवाई के पीछे एक सेवानिवृत्त एसडीओ को पदस्थ करने की तैयारी भी चर्चा में है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सीईओ को भी नोटिस, वित्तीय प्रबंधन पर सवाल
प्रबंध संचालक कमोलिका मोहन्ता ने सीईओ गीतांजलि जे. को भी नोटिस जारी किया है। आरोप है कि करोड़ों रुपये की खरीदी, निर्माण कार्यों के भुगतान, वार्षिक बजट और लेखा संबंधी जानकारी समय पर मुख्यालय को उपलब्ध नहीं कराई गई। बताया जाता है कि मुख्यालय की ओर से इस संबंध में पांच स्मरण पत्र भी भेजे गए थे। इसके अलावा आयुष विभाग और संजीवनी केंद्र को दवाइयों की आपूर्ति में देरी की शिकायतें भी सामने आईं, जिसके बाद मुख्यालय ने नाराजगी जताई।
टेंडर प्रक्रिया भी विवादों में, वेंडरों ने लगाए आरोप
एमएफपी पार्क की टेंडर प्रक्रिया भी विवादों में है। कुछ वेंडरों ने आरोप लगाया है कि तकनीकी बोली का परीक्षण वित्तीय बोली खुलने के बाद किया गया और उसी आधार पर निविदा निरस्त कर दी गई। वहीं, विभागीय सूत्रों के अनुसार कुछ कार्यों के सत्यापन को लेकर उप प्रबंधक और सीईओ के बीच मतभेद भी सामने आए। फिलहाल इन सभी मामलों की जांच अलग-अलग स्तर पर की जा रही है और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।
