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सीएम हेल्पलाइन में शिकायतों की लंबी सूची; वन भूमि पर निर्माण, फर्जी भुगतान और नियम विरुद्ध एनओसी देने के आरोप

गणेश पाण्डेय, भोपाल। राजधानी भोपाल के शाहपुरा क्षेत्र स्थित नगर वन की पहाड़ियों में कथित अवैध कटिंग, अतिक्रमण और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। पर्यावरण वानिकी वनमंडल के अंतर्गत आने वाली 86 नंबर पहाड़ी पर वन भूमि काटकर कॉटन वॉल (रिटेनिंग वॉल) निर्माण कराने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि इस निर्माण के जरिए लगभग 20 हजार वर्गफुट वन भूमि पर कब्जा किया गया है।

मामले की शिकायत सीएम हेल्पलाइन में दर्ज कराई गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि यह पूरा कार्य वन विभाग के स्थानीय अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से कराया जा रहा है। शिकायत में एक विधायक का भी उल्लेख किया गया है, हालांकि आधिकारिक स्तर पर नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है।

वन विभाग की भूमिका पर सवाल

शिकायत में कहा गया है कि जिन अधिकारियों पर वन भूमि की सुरक्षा और अतिक्रमण रोकने की जिम्मेदारी है, वही कथित रूप से अवैध गतिविधियों को संरक्षण दे रहे हैं। एसडीओ और रेंजर की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों के अनुसार, नगर वन क्षेत्र शाहपुरा की 86 और 87 पहाड़ी पर लंबे समय से अवैध खनन और निर्माण गतिविधियां चल रही हैं। आरोप है कि पहाड़ी क्षेत्र से मुरम और पत्थर निकालकर सड़क निर्माण में उपयोग किया गया और इसके लिए फर्जी बिल बनाकर लाखों रुपये के भुगतान दर्शाए गए।

बिना विभागीय परीक्षा रेंजर प्रभार का आरोप

शिकायत में यह भी कहा गया है कि खुमान सिंह ठाकुर को विभागीय परीक्षा पास किए बिना ही रेंज क्रमांक-1 और 4 का प्रभार दे दिया गया, जबकि नियमों के अनुसार ऐसा नहीं किया जा सकता। इसे प्रशासनिक नियमों की अनदेखी और प्रभावशाली संरक्षण का मामला बताया जा रहा है।

वृक्षारोपण क्षेत्र में दुकान और मकान निर्माण का आरोप

प्रभारी रेंजर पर आरोप है कि खजुरी सड़क से धमनिया रोड तक पूर्व में किए गए वृक्षारोपण क्षेत्र को नष्ट कर वहां अवैध दुकान और मकान निर्माण कराया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इससे न केवल हरित क्षेत्र को नुकसान पहुंचा, बल्कि वन संरक्षण नियमों का भी उल्लंघन हुआ।

निजी संस्था को नियम विरुद्ध एनओसी देने का मामला

भोज वेटलैंड क्षेत्र के खानूगांव में स्थित शासकीय भूमि को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार रेंज-4 द्वारा एक निजी संस्था को यह कहते हुए एनओसी जारी की गई कि संबंधित भूमि वन विभाग के अधिपत्य में नहीं आती। इसके बाद वहां निर्माण कार्य शुरू हो गया। शिकायतकर्ताओं ने इसे अधिकारियों और निजी संस्था की मिलीभगत बताया है।

सिंचाई कार्यों में फर्जी भुगतान का आरोप

वर्ष 2024-25 में “सौभाधर पौधों की पानी सिंचाई” कार्य के नाम पर भी कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला सामने आया है। शिकायत में कहा गया है कि जांच के दौरान कार्य स्थल पर वास्तविक काम नहीं मिला, इसके बावजूद भुगतान फाइलें आगे बढ़ा दी गईं। आरोप है कि बाद में अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत से 8 से 9 लाख रुपये का भुगतान करा दिया गया।

डीएफओ बोले- जांच कराएंगे

मामले पर पर्यावरण वानिकी वन मंडल के डीएफओ विजय कुमार ने कहा कि शिकायतों की गंभीरता और तथ्यों की बारीकी से जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही पाए गए तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

राजधानी के संवेदनशील वन क्षेत्र से जुड़ा यह मामला अब प्रशासनिक जवाबदेही, पर्यावरण संरक्षण और राजनीतिक प्रभाव के मुद्दे पर चर्चा का केंद्र बन गया है।