गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में बाघ को गुपचुप तरीके से जलाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। प्रदेश सरकार ने इस मामले में दक्षिण बालाघाट सामान्य वन मंडल के डीएफओ अधर गुप्ता के खिलाफ चार गंभीर आरोपों सहित चार्जशीट जारी कर दी है। उनसे 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है।
चार्जशीट में अधर गुप्ता पर वन्यजीवों की सुरक्षा में लापरवाही, अधीनस्थ कर्मचारियों पर नियंत्रण में विफलता, घटनास्थल का निरीक्षण करने में देरी और आरोपियों को फरार होने देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
बिना वरिष्ठों की जानकारी के जलाया गया था बाघ का शव
मामला लालबर्रा वन परिक्षेत्र के बीट बहियाटिकुर का है, जहां एक बाघ की मौत के बाद बिना वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दिए गैरकानूनी तरीके से उसका दाह संस्कार कर दिया गया। इस घटना की जानकारी 2 अगस्त 2025 को व्हाट्सएप संदेशों के माध्यम से फैली।
चार्जशीट में उल्लेख है कि अधर गुप्ता ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) भोपाल के 2018 में जारी आदेशों का पालन नहीं किया। उन आदेशों के अनुसार, किसी भी वन्यजीव की मौत की सूचना तुरंत निर्धारित मोबाइल नंबरों पर देना अनिवार्य था। लेकिन डीएफओ गुप्ता ने ऐसा न करते हुए दो दिन बाद सूचना भेजी और 10 दिन बाद घटनास्थल का निरीक्षण किया।

आरोपी कर्मचारियों को नहीं रोका गया, फरार हो गए दोनों
चार्जशीट के दूसरे बिंदु में कहा गया है कि मृत बाघ के शव को जलाने के मुख्य आरोपी वनपाल टिकराम हनोते और वनरक्षक हिमांशु घोरमारे घटना के बाद डीएफओ अधर गुप्ता के समक्ष उपस्थित हुए थे, लेकिन इसके बाद भी दोनों को पुलिस अभिरक्षा में लेने की कार्रवाई नहीं की गई।
लापरवाही के कारण दोनों आरोपी फरार हो गए। इस संबंध में वन संरक्षक बालाघाट ने 5 अगस्त को स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन गुप्ता ने उसका भी जवाब समय पर नहीं दिया।
शासन ने माना – “कर्तव्यों के प्रति घोर उदासीनता”
चार्जशीट में स्पष्ट कहा गया है कि डीएफओ अधर गुप्ता द्वारा अपने कर्तव्यों के प्रति घोर उदासीनता और लापरवाही बरती गई है।
राज्य शासन ने माना है कि उन्होंने अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम 1968 का उल्लंघन किया है और अब उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाएगी।
विवादों में रही पत्नी नेहा श्रीवास्तव भी
गौरतलब है कि अधर गुप्ता की पत्नी नेहा श्रीवास्तव भी बालाघाट उत्तर सामान्य वन मंडल की डीएफओ हैं। हाल ही में उन्होंने कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजारे के खिलाफ रिश्वत मांगने की शिकायत की थी, जिससे वन विभाग में हलचल मच गई थी। अब पति पर लगे गंभीर आरोपों ने इस प्रकरण को और चर्चाओं में ला दिया है।
DFO पदोन्नति सूची पर भी सवाल
इधर, प्रदेश में हाल ही में हुई IFS (भारतीय वन सेवा) पदोन्नति प्रक्रिया पर भी सवाल उठे हैं।
धार जिले के सरदारपुर उपवनमंडल के एसडीओ संतोष कुमार रनशोरे, जिन पर वनीकरण क्षतिपूर्ति योजना में वित्तीय गड़बड़ी के आरोप हैं और जिनसे शासन ने ₹56,000 की वसूली भी की थी, उन्हें पदोन्नति सूची में “योग्य” माना गया है। जबकि इसी तरह के एक अन्य मामले में रामकुमार अवधिया को सूची से बाहर रखा गया है। यह निर्णय वन विभाग में पदोन्नति के दोहरे मापदंड को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।
रनशोरे पर लगे थे ये आरोप
चार्जशीट के अनुसार, संतोष कुमार रनशोरे ने डही सूक्ष्म सिंचाई परियोजना से प्रभावित 38.455 हेक्टेयर वनभूमि के बदले क्षतिपूर्ति वनीकरण योजना में तकनीकी अनियमितताएं कीं।
रिपोर्ट में पाया गया कि वनीकरण के दौरान
- पौधारोपण,
- परिवहन,
- बीज बुआई,
- वर्मी कम्पोस्ट खाद वितरण जैसे कार्यों में लापरवाही और वित्तीय गड़बड़ी की गई।
विभाग में कार्रवाई की आहट
वन विभाग सूत्रों का कहना है कि अधर गुप्ता प्रकरण पर शासन जल्द ही विभागीय जांच समिति गठित करेगा। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो उन्हें सेवा से निलंबन का सामना भी करना पड़ सकता है।
