वन विभाग में तबादलों को लेकर बढ़ी सरगर्मी
गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश वन विभाग में बड़े स्तर पर होने वाले तबादलों को लेकर मंत्रालय, वन मुख्यालय और विभागीय गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मुख्य वन संरक्षक (सीएफ), वन मंडलाधिकारी (डीएफओ), एसडीओ और रेंजर स्तर के अधिकारियों की संभावित तबादला सूची को लेकर लगातार मंथन चल रहा है। इस बीच कई अधिकारी अपनी पसंदीदा और प्रभावशाली पोस्टिंग हासिल करने के लिए हर स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। नेताओं और मंत्रियों की सिफारिशों के बीच अब एक धर्मगुरु द्वारा भी अपने अनुयायी अधिकारी के पक्ष में लिखा गया सिफारिशी पत्र विभागीय हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
सूत्रों के अनुसार भोपाल, सिवनी, शहडोल, रीवा और ग्वालियर सर्किल में रिक्त पड़े मुख्य वन संरक्षक (सीएफ) के पदों के साथ-साथ संजय नेशनल पार्क और पन्ना टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर पदों पर नियुक्तियों को लेकर गंभीर मंथन चल रहा है। मंत्रालय और वन मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी अनुभवी तथा प्रबंधन क्षमता वाले अधिकारियों के नामों पर विचार कर रहे हैं। इसके अलावा तीन वर्ष या उससे अधिक समय से एक ही वन मंडल में पदस्थ डीएफओ को हटाकर नई जिम्मेदारियां देने तथा करीब डेढ़ दर्जन से अधिक डीएफओ की नई पदस्थापना को लेकर भी चर्चा जारी है। तबादलों के इस दौर में एक आईएफएस अधिकारी के लिए धर्मगुरु द्वारा लिखा गया कथित सिफारिशी पत्र सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है। बताया जा रहा है कि संबंधित अधिकारी देवास या खंडवा जैसे महत्वपूर्ण वन मंडलों में पदस्थ होने के लिए प्रयासरत हैं।
जंगल की चिंता कम, पोस्टिंग की चिंता ज्यादा?
वन विभाग में इन दिनों वर्किंग प्लान को लेकर भी चर्चा तेज है। विभागीय जानकारों के अनुसार वर्किंग प्लान को वन प्रबंधन का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज माना जाता है। इसे जंगलों की दीर्घकालिक विकास योजना और वनों की “अंतरात्मा” तक कहा जाता है। इसी दस्तावेज के आधार पर अगले दस वर्षों की वन प्रबंधन रणनीति तैयार की जाती है।

वर्किंग प्लान में जंगलों की स्थिति, कटाई की अनुमति, पौधरोपण और संरक्षण की रूपरेखा तय की जाती है, लेकिन कई युवा आईएफएस अधिकारी अब इस जिम्मेदारी से दूरी बनाना चाहते हैं। सूत्रों का दावा है कि वर्ष 2012 बैच के कुछ अधिकारियों को वर्किंग प्लान के साथ अन्य महत्वपूर्ण प्रभार भी दिए गए हैं, जिसके चलते मूल कार्य प्रभावित हो रहा है। विभागीय हलकों में चर्चा है कि कुछ अधिकारी वर्किंग प्लान से मुक्त होकर सर्किल और फील्ड की अधिक प्रभावशाली पोस्टिंग पाने की कोशिश में हैं। मंत्रालय के टॉप फ्लोर तक लगातार संपर्क और पैरवी का दौर जारी है। बताया जा रहा है कि कुछ अधिकारी अपनी मजबूत पहुंच के दम पर तबादला प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं।
2022 बैच के आईएफएस भी प्राइम पोस्टिंग की दौड़ में
तबादलों की चर्चा के बीच वर्ष 2022 बैच के भारतीय वन सेवा अधिकारियों की पदस्थापना भी चर्चा का विषय बनी हुई है। सामान्यतः नए आईएफएस अधिकारियों को सामाजिक वानिकी अथवा उत्पादन शाखा जैसे पदों पर नियुक्त करने की परंपरा रही है। वन मुख्यालय ने भी ऐसे ही पदों पर नियुक्ति का प्रस्ताव शासन को भेजा है, लेकिन सूत्रों के अनुसार कुछ युवा अधिकारी पहली ही पोस्टिंग में बड़े और प्रभावशाली वन मंडलों की जिम्मेदारी पाने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं। यही कारण बताया जा रहा है कि करीब डेढ़ माह बाद भी उनकी पदस्थापना लंबित बनी हुई है। अब विभागीय गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अंतिम तबादला सूची में प्रशासनिक आवश्यकता और अनुभव को प्राथमिकता मिलेगी या फिर प्रभाव, पैरवी और सिफारिशें भारी पड़ेंगी।
इन पदों पर सबसे ज्यादा नजर
वन विभाग में इस बार भोपाल, सिवनी, शहडोल, रीवा और ग्वालियर सर्किल के मुख्य वन संरक्षक (सीएफ) पदों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा है। इसके अलावा संजय नेशनल पार्क और पन्ना टाइगर रिजर्व में फील्ड डायरेक्टर की नियुक्ति को लेकर भी मंथन जारी है। विभागीय सूत्रों का मानना है कि इन पदों पर होने वाली नियुक्तियां आगामी वर्षों की वन प्रशासनिक दिशा तय करेंगी।
धर्मगुरु की सिफारिश क्यों बनी चर्चा?
तबादला सीजन के बीच एक आईएफएस अधिकारी के लिए धर्मगुरु द्वारा लिखा गया कथित सिफारिशी पत्र वन विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि संबंधित अधिकारी देवास अथवा खंडवा जैसे महत्वपूर्ण वन मंडलों में पदस्थ होना चाहते हैं। विभागीय गलियारों में यह चर्चा इसलिए भी तेज है क्योंकि आमतौर पर तबादलों में नेताओं और मंत्रियों की सिफारिशें सामने आती हैं, लेकिन धर्मगुरु की सिफारिश का मामला कम ही देखने को मिलता है।
वर्किंग प्लान छोड़ने की क्यों होड़?
वर्किंग प्लान को वन विभाग की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी शाखाओं में माना जाता है। इसी के आधार पर अगले दस वर्षों के लिए जंगलों के संरक्षण, कटाई और पौधरोपण की रणनीति तैयार होती है। इसके बावजूद कई युवा आईएफएस अधिकारी वर्किंग प्लान से बाहर निकलकर सर्किल और फील्ड की प्रभावशाली पोस्टिंग पाने की कोशिश में हैं। विभागीय जानकारों का मानना है कि यदि इस शाखा को पर्याप्त महत्व नहीं मिला तो दीर्घकालिक वन प्रबंधन योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं।
