फरार वनरक्षकों पर 5-5 हजार रुपये का इनाम घोषित, डीएफओ-एसडीओ को फिलहाल अभयदान
गणेश पाण्डेय, भोपाल। बालाघाट जिले के लालबर्रा रेंज में बाघिन की संदिग्ध मौत और शव को जलाने के मामले में बड़ा सवाल उठ खड़ा हुआ है। स्टेट टाइगर फोर्स ने फरार वनरक्षक हिमांशु घोरमारे और वनपाल तिलकराम हिनोते पर 5-5 हजार रुपये का इनाम घोषित कर दिया है। दोनों 2 अगस्त से फरार चल रहे हैं। वहीं इसी प्रकरण में छह वनकर्मियों – मानसिंह, हरिलाल गौंड, देव सिंह, शैलेष सिंह, शिव कुमार और अनुज को गिरफ्तार भी किया जा चुका है।
लेकिन इस बीच आरोपों के घेरे में आए डीएफओ अधर गुप्ता और एसडीओ बी.आर. सिरसाम पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। सूत्रों का कहना है कि इन दोनों अधिकारियों को बचाने की कोशिश की जा रही है। जबकि स्टेट टाइगर फोर्स की जांच रिपोर्ट में दोनों की भूमिका पर गंभीर सवाल उठे थे।

15 दिन से लंबित कार्रवाई
वन विभाग के सूत्रों के मुताबिक, एसडीओ बीआर सिरसाम को निलंबित करने का प्रस्ताव और डीएफओ अधर गुप्ता को हटाने का प्रस्ताव 15 दिनों से एसीएस वन अशोक वर्णवाल की टेबल पर लंबित है। आश्चर्य की बात है कि निचले स्तर के वनकर्मियों पर तत्काल गिरफ्तारी और इनाम की कार्रवाई हो गई, लेकिन बड़े अफसर अब तक कुर्सी पर जमे हुए हैं।

विधायक को दिया था आश्वासन
इस मुद्दे पर पिछले सप्ताह बालाघाट की विधायक अनुभा मुंजारे खुद एसीएस अशोक वर्णवाल से मिली थीं। तब उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि दोषी अफसरों पर जल्द कार्रवाई होगी। मगर आश्वासन को एक हफ्ता बीत जाने के बाद भी कोई कदम नहीं उठाया गया है। यही वजह है कि वन्यजीव प्रेमी और जनप्रतिनिधि सवाल उठा रहे हैं कि आखिरकार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों टल रही है?
आईएफएस लॉबी पर सवाल
सूत्रों का दावा है कि विभाग के अंदर एक मजबूत आईएफएस लॉबी डीएफओ अधर गुप्ता को हटाने के खिलाफ दबाव बना रही है। इस वजह से एसीएस स्तर पर कार्रवाई अटकी हुई है।
जनप्रतिनिधियों और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों का कहना है कि बाघिन की मौत जैसे गंभीर मामले में यदि जिम्मेदार अफसरों पर ही कार्रवाई नहीं होगी, तो छोटे कर्मचारियों पर गाज गिराना केवल “न्याय का दिखावा” माना जाएगा।
👉 अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि एसीएस वन और सरकार कब तक इस मामले में निर्णायक कदम उठाते हैं।
