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गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश वन विभाग को नया नेतृत्व मिलने जा रहा है। वन विकास निगम के प्रबंध संचालक वीएन अंबाड़े को राज्य सरकार ने अगला वन बल प्रमुख नियुक्त करने का निर्णय ले लिया है। गुरुवार को मुख्य सचिव अनुराग जैन की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में 1988 बैच के वरिष्ठ भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारी अंबाड़े को यह जिम्मेदारी सौंपने को हरी झंडी दे दी गई। वे आगामी 1 अगस्त को कार्यभार ग्रहण करेंगे। हालांकि उनका कार्यकाल मात्र 7 माह का होगा, लेकिन उनके सामने विभाग को दुरुस्त करने की चुनौतियों की एक लंबी फेहरिस्त होगी।

असीम श्रीवास्तव 31 जुलाई को होंगे सेवानिवृत्त

वर्तमान वन बल प्रमुख असीम श्रीवास्तव 31 जुलाई को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। श्रीवास्तव का 17 महीनों का कार्यकाल विवादों और विभागीय असंतुलन के लिए चर्चित रहा है। उनके नेतृत्व में वन मुख्यालय से लेकर फील्ड तक का प्रशासनिक ढांचा चरमराता नजर आया। पदस्थापना को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठे, जिसमें दागी और कनिष्ठ अफसरों को सर्किल और प्रमुख वनमंडलों का प्रभार सौंपने की शिकायतें प्रमुख रहीं

जांच प्रतिवेदनों पर निर्णय वर्षों तक लंबित पड़े रहे, जिससे विभागीय अनुशासन प्रभावित हुआ। महत्वपूर्ण पद महीनों खाली रहे, लेकिन श्रीवास्तव इन पदों को भरवाने के लिए अपर मुख्य सचिव (वन) पर कोई ठोस दबाव नहीं बना सके। यही नहीं, बीते जून में पांच सितारा होटलों में परिवार सहित कार्यशाला आयोजित कर वे अतिरिक्त सुर्खियों में आ गए थे, जिसकी आलोचना विभागीय हलकों में हुई।

विभागीय हलचलों में सुदीप सिंह का प्रशासनिक पुनर्वास

सेवानिवृत्त पीसीसीएफ (विकास) सुदीप सिंह को लेकर वन विभाग में प्रशासनिक पुनर्वास की सुगबुगाहट तेज हो गई है। वन बल प्रमुख श्रीवास्तव ने अपने सेवानिवृत्त होने से पहले ही तीन अलग-अलग प्रस्ताव मंत्रालय को भेज दिए हैं, जिससे सुदीप सिंह को कोई नई भूमिका मिल सके।

लेकिन इन प्रस्तावों के सामने आते ही मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से लेकर मंत्रालय के गलियारों तक सुदीप सिंह के खिलाफ पुरानी शिकायतों की फाइलें फिर से चर्चा में आ गई हैं। इनमें से कई शिकायतें पूर्व में दबा दी गई थीं, जिनमें अनुशासनहीनता, पद के दुरुपयोग और प्रभावशाली लॉबी से संबंध जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं।

वीएन अंबाड़े के सामने चुनौतीपूर्ण एजेंडा

वीएन अंबाड़े को अपने संक्षिप्त कार्यकाल में कई मोर्चों पर निर्णायक हस्तक्षेप करना होगा:

  • पदस्थापन में पारदर्शिता लाना
  • फील्ड और सप्लाई लॉबी के नेक्सस को तोड़ना
  • रिक्त पदों की त्वरित पूर्ति कराना
  • लंबित जांचों पर निर्णय लेना
  • वन संरक्षण, मानव-वन्यजीव संघर्ष और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वनीकरण जैसे मोर्चों पर ठोस पहल

अंबाड़े की छवि एक ईमानदार और अनुशासित अधिकारी की रही है, लेकिन फील्ड में गहराई से जमे नेटवर्क और निर्णयहीनता के वातावरण को बदलना आसान नहीं होगा। वन विभाग के भीतर विश्वसनीयता बहाल करने के लिए दृढ़ इच्छाशक्ति और स्पष्ट नेतृत्व की आवश्यकता होगी।