वन भवन भोपाल

पदोन्नति के बाद तबादलों पर बढ़ा विवाद, कई सर्किलों में कर्मचारियों की नाराजगी

गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश वन विभाग में पदोन्नति के बाद की गई नई पदस्थापनाओं को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। कर्मचारियों और अधिकारियों का आरोप है कि कई सर्किलों में पदोन्नति के साथ मनमाने तबादले किए गए, जिससे विभागीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं। मामला तब और गंभीर हो गया जब पेंच टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर जे. देवा प्रसाद ने प्रभारी वन संरक्षक (सिवनी) द्वारा की गई पदस्थापनाओं पर औपचारिक आपत्ति दर्ज कर मुख्यालय को पत्र भेज दिया। उनका कहना है कि अनुभवी कर्मचारियों को हटाने से वन्यजीव सुरक्षा, स्थापना और वित्तीय कार्यों पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। ऐसी स्थिति केवल सिवनी तक सीमित नहीं है, बल्कि भोपाल, रीवा, खंडवा, शहडोल, ग्वालियर और अन्य सर्किलों में भी सामने आई है। नरसिंहगढ़ वन मंडल में तो पदोन्नत हुए लगभग सभी कर्मचारियों का स्थानांतरण कर दिया गया।

पेंच के फील्ड डायरेक्टर ने मुख्यालय को लिखा पत्र

फील्ड डायरेक्टर जे. देवा प्रसाद ने अपने पत्र में कहा है कि स्थापना और व्यय शाखा में कार्यरत चार अनुभवी कर्मचारियों का स्थानांतरण कर दिया गया, जबकि उनके स्थान पर पर्याप्त अनुभवी स्टाफ उपलब्ध नहीं कराया गया। इससे स्थापना, वेतन, वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक कार्यों के नियमित संचालन में कठिनाई आएगी। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि केवल दो कर्मचारियों की पदोन्नति कर उनकी पदस्थापना की गई, जबकि स्थानांतरित कर्मचारियों की संख्या उससे कहीं अधिक है।

टाइगर रिजर्व से अनुभवी स्टाफ हटाने पर जताई आपत्ति

पत्र में यह भी कहा गया है कि पेंच टाइगर रिजर्व के 33 वनरक्षकों और 11 वनपालों को पदोन्नति मिली, जिनमें से 14 वनरक्षक और दो वनपाल अन्य वन मंडलों में भेज दिए गए, जबकि रिजर्व में ही संबंधित पद रिक्त थे। फील्ड डायरेक्टर का तर्क है कि टाइगर रिजर्व में वर्षों से प्रशिक्षित और अनुभवी कर्मचारियों को हटाने से वन्यजीव संरक्षण, रेस्क्यू ऑपरेशन और मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन जैसे संवेदनशील कार्य प्रभावित होंगे। इन कर्मचारियों को प्रशिक्षित करने में शासन की राशि और समय दोनों खर्च हुए हैं।

‘पदीय अधिकारों के दुरुपयोग’ का भी लगाया आरोप

जे. देवा प्रसाद ने अपने पत्र में आरोप लगाया है कि क्षेत्र संचालक की सहमति के बिना तथा कर्मचारियों के विरुद्ध किसी शिकायत या उनके आवेदन के अभाव में स्थानांतरण किए गए। उन्होंने इसे टाइगर रिजर्व संबंधी दिशा-निर्देशों की अनदेखी बताते हुए कहा कि इससे वन्यजीव सुरक्षा और प्रबंधन कार्यों में व्यवधान उत्पन्न होगा। उन्होंने मुख्यालय से पूरे मामले की समीक्षा करने का आग्रह किया है।

सर्किल प्रभारी संध्या का जवाब- ’20-30 साल से जमे लोगों में बदलाव जरूरी’

प्रभारी वन संरक्षक सुश्री संध्या ने टेक्स्ट संदेश के माध्यम से अपना पक्ष रखते हुए कहा कि कई कर्मचारी 20 से 30 वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ थे और व्यवस्था में सुधार के लिए बदलाव आवश्यक था। उन्होंने कहा कि देवा प्रसाद द्वारा भेजी गई जानकारी तथ्यात्मक नहीं है। उनके अनुसार पेंच और नरसिंहपुर से संबंधित कई शिकायतें पहले से लंबित हैं तथा अनुभवी स्टाफ को सामान्य वन मंडलों में वन्यजीव प्रबंधन मजबूत करने के उद्देश्य से स्थानांतरित किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को हटाना नहीं, बल्कि पूरे वन वृत्त में कार्यकुशलता बढ़ाना है।