वन्यजीव से मानवीय व्यवहार पड़ा भारी
गणेश पाण्डेय, भोपाल। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चूरना रेंज में पदस्थ सब डिविजनल ऑफिसर (एसडीओ) विनोद वर्मा को एक सांभर हिरण को पोहा खिलाने और उसके साथ पालतू जानवर जैसा व्यवहार करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद निलंबित कर दिया गया है। वन विभाग की इस कार्रवाई ने वन्यजीवों के साथ अधिकारियों के व्यवहार और वन्यजीव संरक्षण के नियमों के पालन को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
दरअसल, कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ था, जिसमें एसडीओ विनोद वर्मा जंगल में बैठकर पोहा खाते हुए दिखाई दे रहे हैं और अपने पास खड़े एक सांभर हिरण को भी पोहा खिलाते तथा उसे दुलारते नजर आ रहे हैं। बताया गया कि संबंधित सांभर का पूर्व में रेस्क्यू किया गया था। खास बात यह रही कि यह वीडियो स्वयं एसडीओ द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किया गया था, जिसके बाद मामला विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा।

वीडियो वायरल होने के बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया। विभागीय स्तर पर पूरे मामले की समीक्षा की गई और प्रथम दृष्टया इसे वन्यजीव संरक्षण के स्थापित मानकों के विपरीत माना गया। इसके बाद एसडीओ विनोद वर्मा को निलंबित करने की कार्रवाई की गई। वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि संरक्षित क्षेत्रों में कार्यरत अधिकारियों से वन्यजीवों के साथ निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन करने की अपेक्षा की जाती है।
वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि जंगली जानवरों को मानव भोजन खिलाना और उनके साथ अत्यधिक मानवीय संपर्क बनाना उनके प्राकृतिक व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। यदि वन्यजीव मानव भोजन के अभ्यस्त हो जाते हैं तो वे भोजन की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आने लगते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने का खतरा रहता है। इसके अलावा मनुष्यों के सीधे संपर्क से वन्यजीवों में संक्रमण और बीमारियों का जोखिम भी बढ़ सकता है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वन विभाग आम पर्यटकों और स्थानीय लोगों को लगातार यह सलाह देता है कि वे जंगल में किसी भी वन्यजीव को भोजन न दें और उनसे सुरक्षित दूरी बनाए रखें। ऐसे में विभाग के ही एक अधिकारी का वीडियो सामने आने के बाद वन्यजीव संरक्षण के नियमों के समान पालन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
क्या कहते हैं वन्यजीव संरक्षण के नियम?
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार संरक्षित क्षेत्रों में किसी भी जंगली जानवर को मानव भोजन देना, उसे अनावश्यक रूप से छूना या उसके प्राकृतिक व्यवहार में हस्तक्षेप करना उचित नहीं माना जाता। इसका उद्देश्य वन्यजीवों की प्राकृतिक प्रवृत्ति और भोजन श्रृंखला को सुरक्षित रखना है। यदि वन्यजीव मानव भोजन के आदी हो जाते हैं तो उनके जंगल छोड़कर आबादी वाले क्षेत्रों में आने की संभावना बढ़ जाती है, जिससे उनकी और लोगों दोनों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

विशेषज्ञ ने उठाए दो बड़े सवाल
वन्यजीव विशेषज्ञ अजय दुबे ने कहा कि जब आम लोगों के लिए सोशल मीडिया पर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के वन्यजीवों की तस्वीरें और वीडियो साझा करने पर प्रतिबंध है, तो अधिकारियों द्वारा स्वयं ऐसे वीडियो पोस्ट करना सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत जंगली जानवरों को भोजन देने और उनके अत्यधिक करीब जाने पर रोक है, फिर अधिकारियों को इससे छूट क्यों मिले? उनके अनुसार इस तरह की गतिविधियां वन्यजीवों के स्वास्थ्य और व्यवहार दोनों के लिए नुकसानदेह हो सकती हैं।
क्यों खतरनाक है जंगली जानवरों को मानव भोजन खिलाना?
विशेषज्ञों के अनुसार जंगली जानवरों को मानव भोजन देने से उनकी प्राकृतिक भोजन खोजने की क्षमता प्रभावित होती है। धीरे-धीरे वे मनुष्यों पर निर्भर होने लगते हैं और भोजन की तलाश में गांवों या पर्यटन क्षेत्रों तक पहुंच सकते हैं। इससे दुर्घटनाओं और मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका बढ़ जाती है। इसके अलावा मनुष्यों के संपर्क से कई संक्रामक रोग वन्यजीवों तक पहुंचने का खतरा भी बना रहता है।
