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डीएफओ बोले– एसडीओ से कराएंगे जांच, जबकि उन्हीं पर रिश्वत का बड़ा आरोप लंबित

गणेश पाण्डेय, भोपाल। मध्यप्रदेश के सीहोर वनमंडल में फिर एक बार ‘पैसे दो और काम करवाओ’ की संस्कृति उजागर हुई है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही दो ऑडियो क्लिपिंग्स ने जंगल महकमे की जड़ तक फैली भ्रष्टाचार की सच्चाई को सामने ला दिया है। इन क्लिपिंग्स में विभागीय स्थापना शाखा में पदस्थ बाबू प्रहलाद माहेश्वरी द्वारा एक महिला कर्मचारी को भारमुक्त करने के बदले 5 हजार रुपये की मांग करते हुए स्पष्ट रूप से सुना जा सकता है।

सूत्रों के अनुसार, यह महिला कर्मचारी हाल ही में स्थानांतरित हुई हैं, और उनके पति अमित जैन से की गई बातचीत में बाबू साहब स्पष्ट रूप से धन की डिमांड कर रहे हैं। बातचीत में जैन “बाबूजी कुछ कम करो…” कहकर विनती कर रहे हैं, जिस पर बाबू पहले 5 हजार और फिर बातचीत में रियायत करते हुए 4 हजार पर आ जाते हैं।

डीएफओ बोले– एसडीओ से जांच कराएंगे, पर खुद हैं विवादों में घिरे

जब यह मामला डीएफओ एमएस डाबर के संज्ञान में लाया गया तो उन्होंने पहले इसे हल्के में लिया। लेकिन जब बताया गया कि उनके ही अधीनस्थ कर्मचारी पर यह आरोप है, तो उन्होंने बयान दिया कि एसडीओ एलविन वर्मन से जांच करवाई जाएगी। परंतु यहां यह तथ्य भी महत्वपूर्ण है कि एसडीओ वर्मन स्वयं भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से घिरे हैं। उनके खिलाफ पहले से ही 12 लाख की रिश्वत मांगने संबंधी ऑडियो वायरल हो चुका है, और लोकायुक्त डीजी द्वारा अभियोजन की स्वीकृति भी मांगी गई है।

बातचीत के प्रमुख अंश में रिश्वत की पुष्टि

वायरल ऑडियो में अमित जैन और बाबू माहेश्वरी के बीच संवाद में कई बार पैसों की मांग को लेकर बातचीत होती है:

अमित: हेलो, बाबू जी कुछ कम करो। पांच हजार ज्यादा हो रहा है….
माहेश्वरी: स्थानांतरण कराने में लाखों रुपए वहां खर्च कर दिए….
अमित: बाबू जी वहां कि बात मत करो, मैंने कैसे करवाए….. पांच हजार बहुत ज्यादा है। बाबू जी,  देखों जॉइनिंग में 25-30 हजार दिए थे.. अभी भी कुछ देकर आया था..
माहेश्वरी: हम तो मना कर रहे थे, तुमने थमा दिए……
अमित: बाबूजी कुछ कम करो, कुछ ज्यादा हो रहें हैं……
माहेश्वरी: चलो 4 हजार दे देना….. रेंज आ जाना, मेडम लिखकर दे देगी.
अमित: कल dfo साब का फोन आया था…
माहेश्वरी: मेडम ने साब को क्या बोला….
अमित: मैं तो बाहर कार खड़ी करने आ गया था….मेडम ने साब से क्या बोला, नहीं पता। सोमवार को बुलाया है……
माहेश्वरी: कह तो रहा हूं सोमवार को आ जाना, 4-5 दिन में… कर दूंगा….

 

इस बातचीत से स्पष्ट है कि यह कोई अपवाद नहीं, बल्कि स्थापित प्रथा का हिस्सा है। यह मामला वन विभाग की आंतरिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।

इनका कहना है

सीहोर डीएफओ को बोलता हूं कि जांच कर कड़ी कार्यवाही करें।
राजेश खरे, सीसीएफ भोपाल

पूर्ववर्ती प्रकरण और मौजूदा चुप्पी

यह पहली बार नहीं है जब सीहोर वन विभाग में इस तरह की घटनाएं सामने आई हैं। पूर्व में भी इस मंडल से संबंधित कई ऑडियो, लेन-देन और सिफारिशों की कहानियां बाहर आ चुकी हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर महज़ “जांच करवा लेंगे” की औपचारिकता निभाई जाती रही है।

अब कार्रवाई या फिर कागजी खानापूर्ति?

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विभाग इस गंभीर मामले में क्या ठोस कार्रवाई करता है या यह भी अन्य प्रकरणों की तरह किसी फाइल में दबकर रह जाएगा। यह मामला न केवल एक कर्मचारी के अधिकारों का हनन है, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की साख पर चोट है।