Tiger inset zoom

कर्मचारी ने कबूला—गूगल एआई से तैयार की थी तस्वीर

गणेश पाण्डेय, भोपाल। ग्वालियर वन मंडल क्षेत्र के संदलपुर रेलवे पुल के पास बाघ दिखाई देने की वायरल सूचना ने दो दिनों तक वन विभाग, रेलवे अधिकारियों और स्थानीय ग्रामीणों के बीच हड़कंप मचाए रखा। सोशल मीडिया और व्हाट्सएप समूहों में तेजी से फैली एक तस्वीर को लेकर यह दावा किया गया कि रेलवे पुल के आसपास बाघ घूम रहा है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए वन विभाग ने तत्काल खोज अभियान शुरू किया, लेकिन जांच पूरी होने पर चौंकाने वाला खुलासा सामने आया। विभागीय जांच में पता चला कि वायरल तस्वीर वास्तविक नहीं थी, बल्कि रेलवे लाइन पर कार्यरत एक कर्मचारी द्वारा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से तैयार की गई थी। मामले के खुलासे के बाद वन विभाग ने इसे गंभीर मानते हुए साइबर सेल को पत्र लिखकर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की है।

व्हाट्सएप पर वायरल हुई तस्वीर से मचा हड़कंप

वन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार 21 मई 2026 को रात करीब साढ़े नौ बजे व्हाट्सएप के माध्यम से सूचना मिली कि डबरा क्षेत्र के संदलपुर रेलवे पुल के पास बाघ देखा गया है। वायरल तस्वीर में रेलवे पुल के समीप बाघ दिखाई देने का दावा किया गया था। चूंकि क्षेत्र वन बीट बजरी के अंतर्गत आता है और वन्यजीवों की आवाजाही की संभावना को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता था, इसलिए विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया। सूचना मिलते ही वन विभाग में हड़कंप मच गया और अधिकारियों की टीम मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई। अधिकारियों ने पुल के आसपास के क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी के प्रमाण तलाशने का प्रयास किया, लेकिन मौके पर किसी भी प्रकार के पदचिह्न, शिकार के अवशेष अथवा अन्य संकेत नहीं मिले।

दूसरे दिन भी जारी रही जांच

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वन विभाग ने 22 मई को भी पूरे क्षेत्र का व्यापक निरीक्षण किया। विभागीय अमले ने आसपास के जंगल, रेलवे ट्रैक और ग्रामीण इलाकों में खोजबीन की, लेकिन बाघ की मौजूदगी का कोई प्रमाण नहीं मिला। लगातार दो दिनों तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद अधिकारियों को वायरल तस्वीर की सत्यता पर संदेह होने लगा। इसके बाद वन विभाग ने तस्वीर के स्रोत की जांच शुरू की और रेलवे कर्मचारियों से पूछताछ की। जांच के दौरान यह जानकारी सामने आई कि फोटो रेलवे लाइन पर लुब्रिकेशन कार्य करने वाली एक निजी कंपनी के कर्मचारी से जुड़ा हो सकता है।

IMG 20260601 WA0019
रेलवे कर्मचारी का कबूलनामा

पूछताछ में सामने आई पूरी सच्चाई

वन विभाग ने 23 मई को संबंधित कर्मचारी विशाल कुमार (21 वर्ष) को कार्यालय बुलाकर पूछताछ की। पूछताछ के दौरान विशाल कुमार ने लिखित बयान में स्वीकार किया कि उसने संदलपुर रेलवे पुल का वास्तविक फोटो लिया था, लेकिन बाद में गूगल एआई की सहायता से उसमें बाघ की तस्वीर जोड़ दी। अपने बयान में उसने बताया कि वह फोटो अपने साथी कर्मचारी उत्तम वर्मा को डराने के उद्देश्य से बनाई गई थी। इसके बाद यह फोटो एक व्हाट्सएप समूह “झांसी रेलवे लाइन डबरा” में साझा की गई, जहां से वह तेजी से अन्य समूहों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैल गई।विशाल कुमार ने यह भी कहा कि उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि तस्वीर इतनी तेजी से वायरल हो जाएगी और इससे वन विभाग तथा प्रशासनिक तंत्र में हलचल मच जाएगी। उसने अपनी गलती स्वीकार करते हुए भविष्य में ऐसी गलती दोबारा नहीं करने का आश्वासन दिया।

अफवाह के कारण प्रभावित हुए विभागीय काम

वन मंडलाधिकारी द्वारा साइबर सेल को भेजे गए पत्र में उल्लेख किया गया है कि वायरल तस्वीर के कारण पिछले दो दिनों तक वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी लगातार जांच और सत्यापन में लगे रहे। इस दौरान विभाग के अन्य महत्वपूर्ण कार्य प्रभावित हुए। पत्र में यह भी कहा गया है कि बाघ की सूचना के कारण आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भय का वातावरण बन गया था। कई लोगों ने जंगल और खेतों की ओर जाना कम कर दिया, जबकि क्षेत्र में तरह-तरह की अफवाहें फैलने लगीं। विभाग को बार-बार लोगों को स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी।

साइबर सेल से कार्रवाई की मांग

वन विभाग ने मामले को केवल एक शरारत नहीं बल्कि सार्वजनिक भ्रम और भय फैलाने वाला कृत्य माना है। इसी आधार पर ग्वालियर के पुलिस अधीक्षक, साइबर सेल को पत्र भेजकर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम एवं अन्य प्रासंगिक कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है। वन विभाग का मानना है कि डिजिटल तकनीक और एआई के बढ़ते उपयोग के दौर में इस प्रकार की फर्जी तस्वीरें और सूचनाएं गंभीर प्रशासनिक चुनौतियां पैदा कर सकती हैं। ऐसे मामलों में समय पर कार्रवाई न होने पर वन्यजीव संरक्षण, कानून-व्यवस्था और जनसुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

एआई के दुरुपयोग का नया उदाहरण

यह मामला एक बार फिर इस बात को सामने लाता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी आधुनिक तकनीक का दुरुपयोग किस प्रकार वास्तविकता और अफवाह के बीच की रेखा को धुंधला कर सकता है। एक मजाक के तौर पर बनाई गई तस्वीर ने न केवल वन विभाग को दो दिनों तक व्यस्त रखा, बल्कि ग्रामीणों के बीच डर और भ्रम का माहौल भी पैदा कर दिया। अब सभी की नजर साइबर सेल की कार्रवाई और आगे की जांच पर टिकी हुई है, जिससे यह तय होगा कि फर्जी डिजिटल सामग्री फैलाने के इस मामले में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ क्या कानूनी कदम उठाए जाते हैं।